नई दिल्ली: कहते हैं कि खुद को पहचान पाना सबके बस की बात नहीं, कुछ लोग तो देर से तो कुछ कभी खुद की काबीलियत को पहचान नहीं पाते. ऑस्कर अवॉर्ड विनर फिल्म के डायरेक्ट शेखर कपूर भी एक ऐसे ही शख्स हैं जो खुद को पहनाने लेकिन थोड़ा देर से. कम ही लोग जानते हैं कि यह बेहतरीन डायरेक्टर अपने फिल्मी कैरियर के पहले चार्टेड एकाउंटेट थे. शेखर कपूर का नाम ऐसे डायरेक्टर्स में शुमार है जिन्होंने न सिर्फ बॉलीवुड में बल्कि हॉलीवुड में भी अपने हुनर का लोहा मनवाया है.

6 दिसंबर 1945 को लाहौर पंजाब पाकिस्तान में शेखर का जन्म हुआ. उनके पिता डॉक्टर कुलभूष्ण कपूर थे. उनकी मां शीलाकांता कपूर और तीन बहनें नीलू, अरुणा और सोहना कपूर हैं. शेखर कपूर के पिता भले ही डॉक्टर थे लेकिन शेखर को शायद अपने मामा की फील्ड में जाना पसंद था.  शेखर कपूर गोल्डन ऐरा के फेमस एक्टर और फिल्म मेकर देवानंद के भांजे हैं.

मॉडर्न स्कूल नई दिल्ली से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद शेखर ने कभी नहीं सोचा होगा कि उनका भविष्य कहां लिखा है. क्योंकि इसके बाद उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन अर्थशास्त्र में दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टेफन कॉलेज से पूरी की. इसके बाद इस नौजवान ने लंदन जाकर चार्टेड अकाउंटेंट की जॉब की.

भारतीय सिनेमा में रुचि रखने वाले शेखर कपूर का मन जब चार्टेड अकांउटेंट की जॉब में नहीं लगा तो उन्होंने अपनी मामा की फील्ड में आने का फैसला किया और भारत वापस आ गए. लेकिन पहली फिल्म 1975 में फिल्म 'जान हाज़िर हो' में इन्हें नोटिस नहीं किया गया. उन्हें अपनी तीसरी फिल्म 'मासूम' से पहचान मिली. इस पारिवारिक ड्रामा मूवी में शेखर की एक्स गर्लफ्रेंड शबाना आजमी ने बतौर हीरोइन काम किया. इस फिल्म की बहुत तारीफ हुई.  

इसके बाद इस डायरेक्टर ने हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों जगह बेहतरीन फिल्में दीं. हॉलीवुड में निर्देशित फिल्म 'एलीजाबेथ' ने ऑस्कर अवॉर्ड जीता. वहीं 'बेंडिट क्वीन' और 'पानी' जैसी फिल्मों को लोग आज भी इंटनेशनल लेवल पर बेहतरीन फिल्मों के शुमार करते हैं.