सेहत दुरुस्त रखने के लिए हेल्दी ब्रेकफास्ट करने की सलाह दी जाती है। वहीं जो लोग मोटापे के शिकार हैं उन्हें भी हल्की-फुल्की पर हैल्दी डाइट लेने की सलाह दी जाती हैं। ऐसी लिस्ट में कॉर्नफ्लेक्स को सबसे ऊपर रखा जाता है क्योंकि ज्यादातर लोगों का मानना है कि इसमें दूध, फल और ड्राई फ्रूट्स के साथ मिलाकर खाने से पोषण पूरा मिलता है वो भी कम कैलोरीज में लेकिन क्या वाक्या ही कॉर्न फलैक्स खाने से वजन कम होता है। 
शरीर से एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न करने के लिए आप भी रोजाना कॉर्नफ्लेक्स का सेवन कर रहे हैं तो पहले जान लें कि 100 ग्राम कॉर्नफ्लेक्‍स में लगभग 357 कैलोरीज पाई जाती है। इससे मोटापा कम होने की बजाय बढ़ना शुरू हो जाता है जोकि सब्जी और रोटी से ज्यादा है। 

कॉर्नफ्लेक्स को टेस्टी और हेल्दी बनाने के लिए लोग इसमें शहद या फिर अतिरिक्त चीनी डाल लेते हैं। जो गंभीर रोगों का कारण बनती है और ब्रेकफास्ट में चीनी की अधिक मात्रा आपके वजन को बढ़ा सकती है। कॉर्नफ्लेक्स बनाने के लिए मकई, फ्रक्टोज (Fructose) और मकई के सिरप का इस्तेमाल किया जाता है, ये सब चीजें शरीर में इंसूलिन की मात्रा को बढ़ा देती हैं। जिससे मोटापे के साथ-साथ डायबिटीज रोग होने की संभावना भी दोगुनी बढ़ जाती है। नाश्ते में इसका सेवन गंभीर परिणाम दे सकता है। 

वजन कम होने या बढ़ने में खान-पान के साथ-साथ मेटाबॉलिजम भी अहम रोल अदा करता है। हर किसी के शरीर में यह प्रक्रिया अलग तरह से काम करती है लेकिन वजन कम करने के मिशन में कॉनफ्लेक्स फेल साबित हुआ है। इसमें अतिरिक्त चीनी मिलाने से कैलोरी ज्यादा बढ़ जाती है, जबकि साधारण नाश्ता करने से ऐसा नहीं होता। 

कॉर्नफ्लेक्स की तुलना में ओट्स का सेवन बेस्ट माना गया है क्योंकि इसमें फाइबर की मात्रा भरपूर होती है। इसके अलावा इसमें गुड प्रोटीन फाइबर, कैल्शियम, फास्फोरसऔर पोटैशियम बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, जिससे शरीर को कई फायदे होते है। 100 ग्राम ओट्स में गुड फैट के साथ कैलोरी 389 ग्राम, पानी 8 प्रतिशत, प्रोटीन 16.9 प्रतिशत, कार्ब 66.3 प्रतिशत, फाइबर 10.6 प्रतिशत और फैट 6.9 प्रतिशत होते हैं। 

बहुत सारे लोग दूध व शहद वाले ओट्स खाना पसंद करते हैं जबकि रंग बिरंगी वेजीटेबल से तैयार किया गया ओट्स ज्यादा हैल्दी होता है। इसमें मटर, गाजर, बीन्स, ब्रोकली आदि मिलाकर खाने से पौष्टिकता और स्वाद दोगुना बढ़ जाता है। 
 

ओट्स का सेवन करने से बहुत देर तक भूख का अहसास नहीं होता। पेट भरा रहने की वजह से अतिरिक्त कैलोरी का सेवन करने से बचाव होता है और मोटापा कम होना शुरू हो जाता है।