कोलकाता : कलकत्ता हाईकोर्ट ने बीजेपी के उन पत्रों का कोई जवाब नहीं देने के लिए शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई, जो उसने राज्य में अपनी रथयात्राओं के लिए अनुमति मांगने के लिए लिखे थे. कोर्ट ने साथ ही राज्य के शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रथयात्राओं पर 14 दिसम्बर तक कोई निर्णय करें. जस्टिस विश्वनाथ सोमादर और जस्टिस ए मुखर्जी की खंडपीठ ने कहा कि अनुमति को लेकर सरकार की चुप्पी ‘आश्चर्यजनक और चौंकाने वाली है.’

कोर्ट ने एकल पीठ के गुरुवार के उस आदेश के खिलाफ बीजेपी की ओर से दायर अपील का निस्तारण कर दिया, जिसमें पार्टी को उसकी रथयात्रा के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था. अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि वह बुधवार तक बैठक करे. कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक 12 दिसम्बर तक भाजपा के तीन प्रतिनिधियों के साथ बैठक करें और 14 दिसम्बर तक मामले में कोई निर्णय करें.

खंडपीठ ने कहा कि एकल पीठ द्वारा रैली पर रोक नहीं लगानी चाहिए थी. खंडपीठ ने गुरुवार के अंतरिम आदेश में तदनुसार संशोधन कर दिया. पीठ ने राज्य में तीन रथयात्राएं करने के लिए अनुमति के वास्ते भाजपा की ओर से लिखे गए पत्रों का जवाब नहीं देने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की.

जस्टिस तपव्रत चक्रवर्ती की सिंगल बैंच ने गुरुवार को कहा कि वह कूचबिहार में भाजपा की रैली के लिए इस वक्त इजाजत नहीं दे सकती जब पश्चिम बंगाल सरकार ने इस आधार पर इस कार्यक्रम को इजाजत देने से इनकार कर दिया है कि यह साम्प्रदायिक तनाव पैदा कर सकता है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शुक्रवार को इस रैली को हरी झंडी दिखाने वाले थे.

अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में भाजपा की तीन रथयात्राओं में से कूचबिहार की रथयात्रा पहली थीं. दो अन्य रथयात्राएं नौ दिसम्बर को दक्षिण 24 परगना जिले के काकद्वीप से और 14 दिसम्बर को बीरभूम जिले के तारापीठ मंदिर से शुरू होनी थीं.