जयपुर: अपने सबसे बड़े चुनावी वादे को पूरा करते हुए राजस्थान की नवनिर्वाचित अशोक गहलोत सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा बुधवार की रात की. मुख्यमंत्री गहलोत ने संवाददाताओं को बताया कि इसके तहत किसानों का सहकारी बैंकों का सारा बकाया कर्ज माफ किया जाएगा. वहीं वाणिज्यिक, राष्ट्रीयकृत व ग्रामीण बैंकों में कर्जमाफी की सीमा दो लाख रुपये रहेगी.

उन्होंने कहा कि कर्ज की गणना के लिए 31 नवंबर 2018 की समयसीमा तय की गई है. सरकार के इस कदम से सरकारी खजाने पर करीब 18000 करोड़ रुपये का बोझ आएगा. उल्लेखनीय है कि गहलोत ने इसी सोमवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. शुरुआत में गहलोत सरकार ने 10 दिन का समय मांगा था लेकिन दबाव को देखते सरकार ने एक सप्ताह के भीतर ही ऐलान कर दिया है.

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकारों पहले ही कर्जमाफी का ऐलान कर चुकी हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभालते ही कमलनाथ ने 17 दिसंबर को कांग्रेस के ‘वचन पत्र’ में किए गए वादे के अनुसार सबसे पहले किसानों के दो लाख रुपये तक के कर्ज माफ करने की फाइल पर हस्ताक्षर किए थे. छ्त्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी पहला फैसला किसान कर्ज माफी का लिया था. 

असम की बीजेपी सरकार भी 600 करोड़ रुपये के कृषि कर्ज माफ करने को मंजूरी दे चुकी है. इससे राज्य में आठ लाख किसानों को लाभ होगा. असम सरकार योजना के तहत सरकार किसानों के 25 प्रतिशत तक कर्ज बट्टे खाते में डालेगी. इसकी अधिकतम सीमा 25,000 रुपये है. इस माफी में सभी प्रकार के कृषि कर्ज शामिल हैं.

यह कृषि कर्ज माफी उन सभी कर्ज पर लागू होंगे जो किसानों ने क्रेडिट कार्ड के जरिये तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से लिए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने ब्याज राहत योजना की भी मंजूरी दी है. इसके तहत करीब 19 लाख किसान अगले वित्त वर्ष से शून्य ब्याज दर पर कर्ज ले सकेंगे. सोमवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय किया गया.