नई दिल्ली: दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष के खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए आराम करने का प्रस्ताव पेश करने के चार महीने बाद, वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय माकन ने गुरुवार देर शाम पद से इस्तीफा दे दिया. सूत्रों ने पुष्टि की है कि उनका इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने स्वीकार कर लिया है. अटकलें हैं कि 80 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित लोकसभा चुनावों के लिए दिल्ली में पार्टी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी ग्रहण कर सकती हैं.

13 दिसंबर, 2018 को टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में, अनुभवी कांग्रेस नेता ने कहा था कि अगर उच्च कमान ने उन्हें दिल्ली में टीम का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपती है तो वह शर्माएंगी नहीं.

54 वर्षीय माकन ने सितंबर 2018 में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन दिसंबर में पांच राज्यों में चुनाव होने तक इसे जारी रखने के लिए कहा गया था. सूत्रों ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बीते शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की और जोर देकर कहा कि वह एक गंभीर ऑर्थोपेडिक बीमारी से पीड़ित हैं और दिल्ली में पार्टी इकाई का नेतृत्व करने की सख्त जिम्मेदारी लेने की स्थिति में नहीं हैं.

माकन के एक निजी सूत्र ने बताया- उन्होंने (माकन) कांग्रेस अध्यक्ष से कहा कि राज्य इकाई प्रमुख को चुनाव से पहले 100 प्रतिशत फिट होना चाहिए, जो वह नहीं थे. उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है और वह अब पार्टी के लिए काम करेंगे और लोकसभा चुनाव के लिए इसे तैयार करेंगे. माकन ने बाद में ट्विटर पर अपने इस्तीफे की घोषणा की. उन्होंने लिखा- 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद, दिल्ली इकाई के अध्यक्ष के रूप में, मुझे कांग्रेस कार्यकर्ताओं, पार्टी को कवर करने वाले मीडिया और हमारे नेता राहुल गांधी जी से बहुत प्यार और समर्थन मिला. इन कठिन समयों में यह आसान नहीं था. आप सभी को धन्यवाद.

पूर्व यूपीए मंत्री को 2015 के विधानसभा चुनावों में अपनी हार के बाद पार्टी का शासन दिया गया था. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वह देश की राजधानी में वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सीलिंग पर विरोध प्रदर्शनों की एक श्रृंखला के बाद पार्टी को वापस लाने में कामयाब रहे थे. हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि वह माकन की जगह कौन लेगा इस बारे में फैसला नहीं कर सकते थे, लेकिन सूत्रों ने कहा कि तीन बार के दिल्ली के मुख्यमंत्री, जिन्होंने पिछले साल दिल की सर्जरी की थी, पार्टी की पसंद हो सकती है.

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी अपने आप को मजबूत करने में दिल्ली इकाई प्रमुख का समर्थन करने के लिए तीन से चार कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त कर सकती है. पार्टी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा- पार्टी ने ओडिशा, तेलंगाना, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति का फार्मूला अपनाया है. इस तरह विभिन्न समुदायों, जिनके पास एक बड़ा वोट बैंक है, उन्हें राज्य में शीर्ष नेतृत्व का प्रतिनिधित्व मिल सकता है. यदि शीला जी को दिल्ली में कार्यभार दिया जाता है तो पार्टी उनके साथ मिलकर काम करने के लिए मुस्लिम, एससी, जाट या गुर्जर और वैश्य नेता को अध्यक्ष नियुक्त करने का निर्णय ले सकती है.