इंदौर: मध्य प्रदेश की टीम को रणजी ट्रॉफी 2018-19 सीजन के आखिरी राउंड में बुधवार (9 जनवरी) को महज 35 रन पर आउट होकर शर्मसार होना पड़ा. आंध्र प्रदेश के खिलाफ इस मैच में मध्य प्रदेश को जीत के लिए 343 रन का लक्ष्य मिला था. इसके जवाब में उसकी शुरुआत बेहद खराब रही, लेकिन किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि ऐसा कुछ भी हो सकता है. उसने अपने आखिरी छह विकेट सिर्फ 23 गेंदों के अंतराल में गंवाए.

दिलचस्प बात यह है कि दो दिन पहले ही त्रिपुरा की टीम भी राजस्थान के खिलाफ महज 35 रन पर आउट हो गई थी. रणजी ट्रॉफी के इतिहास में 35 रन संयुक्‍त रूप से 13वां सबसे छोटा स्‍कोर है. यह मध्य प्रदेश की टीम का इस टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे कम स्‍कोर भी है.

मजेदार बात यह कि मध्य प्रदेश की टीम इस एलीट ग्रुप बी मैच की दोनों पारियों में 100 का स्कोर नहीं छू सकी. मेजबान टीम पहली पारी में 91 रन पर सिमट गई थी. आंध्र की टीम ने पहली पारी में 132 और दूसरी पारी में 301 रन बनाए. इस तरह मध्य प्रदेश को 307 रन की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. इस हार के साथ ही मध्यप्रदेश टूर्नामेंट की नॉकआउट रेस से बाहर हो गई.

इंदौर में खेले गए मैच के तीसरे दिन की शुरुआत आंध्र की बैटिंग से हुई. आंध्र ने अपनी दूसरी पारी सात विकेट पर 198 रन से आगे बढ़ाई. ऐसा लग रहा था कि आंध्र की पारी जल्दी सिमट जाएगी, लेकिन अपना पहला रणजी मैच खेल रहे करन शिंदे ने 103 रन की नाबाद पारी खेलकर अपनी टीम को 300 के पार पहुंचा दिया.

इस तरह मध्य प्रदेश को 343 रन का लक्ष्य मिला. उसने एक समय 3 विकेट पर 35 रन बना लिए थे. उस वक्त मध्य प्रदेश की उम्मीदें मिडिल ऑर्डर और लोअर ऑर्डर पर टिकी थीं. लेकिन आंध्र के गेंदबाजों ने अगले तीन रन के भीतर मध्य प्रदेश के बाकी सात विकेट झटककर मध्य प्रदेश की टीम को शर्मसार होने के लिए मजबूर कर दिया.

मध्य प्रदेश की पूरी टीम दूसरी पारी में 16.5 ओवर में सिमट गई. आंध्र को इसके लिए अपनी गेंदबाजी में एक भी बदलाव नहीं करना पड़ा. केवी शशिकांत आठ ओवर के स्पेल में 16 रन खर्च कर छह विकेट झटके. जबकि, डीपी विजयकुमार ने 8.5 ओवर में 17 रन देकर तीन विकेट लिए. एक बल्लेबाज अब्सेंट हर्ट हुआ. त्रिपुरा की टीम जब दो दिन पहले 35 रन पर आउट हुई थी, तब उसने 18.5 ओवर बल्‍लेबाजी की थी.