नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव की सरगरमी के बीच बजट सत्र की तारीखों का एलान हो गया है. बजट सत्र 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा, एक फरवरी को आम और रेल बजट एक साथ पेश होगा. इससे एक दिन पहले वित्त मंत्री आर्थिक सर्वेक्षण पेश कर सकते हैं. यह फैसला संसदीय मामलों से जुड़ी कैबिनेट कमेटी ने लिया है. बता दें कि चुनावी साल होने की वजह से इस साल अंतरिम बजट ही पेश होगा.

पिछले काफी वक्त से लोकसभा के चुनाव मार्च-अप्रैल महीने में होते आ रहे हैं. इस वजह से अपने कार्यकाल के आखिरी साल में केंद्र सरकार पूर्णकालिक बजट पेश नहीं कर पाती है. हालांकि वर्तमान सरकार के लिए जरूरी होता है कि नई सरकार के आने तक वो सरकारी खर्चों को चलाने का पूरा इंतजाम करे. अब जबकि सरकार को नहीं पता होता कि पूरे साल शासन करने का मौका उसे मिलेगा या नहीं, इसलिए वो कुछ महीनों का बजट ही तैयार करती है. इस बजट को वोट ऑन अकाउंट या (अंतिरम बजट) कहा जाता है.

भारत के संविधान में अंतरिम बजट का कोई जिक्र नहीं है. सरकार चाहे तो साल में दो बार भी बजट पेश कर सकती है. आजाद भारत में पहली बार अंतिरम बजट मोरारजी देसाई ने साल 1962-63 में सरकार के सामने रखा था. इसी तरह साल 1991 में वी पी सिंह की सरकार गिर जाने के बाद यशवंत सिन्हा ने अंतिरम बजट पेश किया था.

बजट में सरकार के साल भर के आय और व्यय का लेखा जोखा होता है. जिसमें सरकार अपने साल भर के खर्च और आय के बारे में संसद को बताती है. सरकार के द्वार पेश किया गया कोई भी बिल 'बजट' है या नहीं इसका फैसला लोकसभा का स्पीकर करता है.

बजट शब्द का जन्म लैटिन शब्द बुल्गा से हुआ है. इसका मतलब चमड़े का थैला होता है. भारत में पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पेश किया. आजाद भारत का पहला बजट आर. के. षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया.