भोपाल: विधानसभा सत्र में आज कांग्रेस की विधायक हिना कांवरे को उपाध्यक्ष चुन लिया गया। इस बीच सदन में अनुपूरक बजट भी पारित किया गया। इसी क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कमलनाथ सरकार का घेराव किया है। उन्होंने कहा है कि, 'विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार बनने पर 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। कांग्रेस की सरकार बन गई, जिसे 10 दिन नहीं 25 दिन हो गए लेकिन व्यावहारिक रूप से किसान के कर्ज का एक नया पैसा माफ नहीं हुआ है।'

विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष @RahulGandhi जी ने सरकार बनने पर 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। कांग्रेस की सरकार बन गई, जिसे 10 दिन नहीं 25 दिन हो गए लेकिन व्यावहारिक रूप से किसान के कर्ज का एक नया पैसा माफ नहीं हुआ है। pic.twitter.com/mP8CkYF89Q

— ShivrajSingh Chouhan (@ChouhanShivraj) January 10, 2019

शिवराज ने कहा कि, 'मध्यप्रदेश में 50 लाख से अधिक किसानों का 40 हजार करोड़ रूपये से अधिक कर्ज माफ होना है, लेकिन अनुपूरक बजट में केवल 5 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान है। मुख्यमंत्री रहते मैंने इसी वर्ष चार माह में फसल बीमा योजना के 52 सौ करोड़ और एक वर्ष में 32,700 करोड़ रूपये किसानों के खाते में डलवाए। प्रदेश सरकार स्पष्ट करे कि 5 हजार करोड़ रुपये कितने लोगों को, कब दिए जाएंगे। 15 से 22 जनवरी तक फॉर्म भरवाए जाएंगे, किसी के खाते में पैसा नहीं आएगा। इतनी जटिलताएं पैदा कर दी गई हैं कि कई किसान अपात्र हो जाएंगे। कर्जमाफी को मुश्किल बना रही प्रक्रिया कांग्रेस क्यों अपना रही है।'

मप्र में 50 लाख से अधिक किसानों का 40 हजार करोड़ रूपये से अधिक कर्ज माफ होना है, लेकिन अनुपूरक बजट में केवल 5 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान है। मुख्यमंत्री रहते मैंने इसी वर्ष चार माह में फसल बीमा योजना के 52 सौ करोड़ और एक वर्ष में 32,700 करोड़ रूपये किसानों के खाते में डलवाए।

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पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि, 'लोकसभा चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने के लिये कर्जमाफी का अधिक प्रचार किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि 22 फरवरी से पैसा खाते में आएगा। मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि फरवरी के अंत या मार्च के पहले सप्ताह में आचार संहिता लग जाएगी, फिर किसान के खाते में पैसा कैसे आएगा? मैं सीधे-सीधे कहना चाहता हूं, कोई आवेदन या फॉर्म भराने की जरूरत नहीं है। ऑन रिकॉर्ड है राष्ट्रीयकृत बैंकों की किस शाखा का कितने किसानों पर कितना बकाया है। सहकारी बैंकों के आंकड़े भी हैं, तो इधर-उधर की बात क्यों कर रहे हो? सीधे किसान के खाते में पैसा डालो। बैंकों को पैसा दे दो।

गेहूं के लिए बजट का इंतजार नहीं कर सकते, क्योंकि आचार संहिता मई तक लग जाएगी, फिर बरसात आ जाएगी, तो गेहूं कब खरीदेंगे। गन्ना किसान परेशान हैं। आज ही भोपाल में प्रदर्शन किया है, उन्हें कम से कम 50 रुपए प्रति क्विंटल देना चाहिए। मैंने गन्ना की फसल पर भी बोनस देने का फैसला किया था।

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कांग्रेस भावांतर में भी केवल 1500 करोड़ रुपए की बात कह रही है, जबकि हमने तो अकेले 1700 करोड़ रुपया गेहूं का बांट दिया था और अब 2100 रुपए प्रति क्विंटल में कांग्रेस को गेहूं खरीदना है तो आनाकानी कर रही है। गेहूं के लिए बजट का इंतजार नहीं कर सकते, क्योंकि आचार संहिता मई तक लग जाएगी, फिर बरसात आ जाएगी, तो गेहूं कब खरीदेंगे। गन्ना किसान परेशान हैं। आज ही भोपाल में प्रदर्शन किया है, उन्हें कम से कम 50 रुपए प्रति क्विंटल देना चाहिए। मैंने गन्ना की फसल पर भी बोनस देने का फैसला किया था। किसानों को ठीक दाम देने के लिए भावांतर योजना के लिए पर्याप्त प्रावधान अनुपूरक बजट में किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया है। इससे नीयत जाहिर होती है कि किसानों को कुछ देना नहीं था, सिर्फ वोट लेना था और अब ऐसे ही बहकाकर कांग्रेस लोकसभा चुनाव में भी वोट लेना चाहती है। इसके बाद शिवराज ने कहा कि,'मैं प्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि सभी किसानों का 2 लाख रुपए तक का लोन माफ करने के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान किया जाए और जो समर्थन मूल्य के नीचे बोनस व अतिरिक्त राशि देने का फैसला हमने किया था, उसे लागू कर किसानों को राहत दी जाए।'