नई दिल्लीः स्वामी विवेकानंद ने भारत के उत्थान और विकास में अहम भूमिका निभाई थी. ऐसे में जब भी स्वामी विवेकानंद का नाम जेहन में आता है तो मन में एक सकारात्मक और शांत ऊर्जा का आभास होता है. वहीं इस मौके पर देश भर के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि दी और उन्हें नम किया. इसके साथ ही पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंद की जयंती पर एक वीडियो के जरिए देश की जनता को संदेश भी दिया और ट्वीट करते हुए कहा कि वह स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उन्हें नमन करते हैं और देश की युवा शक्ति को भी वह सैल्यूट करते हैं. बता दें भारत में स्वामी विवेकानंद की जयंती को 'युवा दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है.

स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्वीट करते हुए कहा कि 'स्वामी विवेकानंद के विचार और आदर्श करोड़ों भारतीयों, विशेषकर हमारे युवाओं को प्रेरित और उत्साहित करते हैं. भारत के निर्माण की प्रेरणा हमें उनसे ही मिलती है. उनसे हमें ऐसे भारत के निर्माण की प्रेरणा मिलती है जो मजबूत, जीवंत, समावेशी हो और कई क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व करने वाला हो.'

“Arise, awake and stop not till the goal is reached.”

Remembering these powerful words, and the rich thoughts of the venerable #SwamiVivekananda on his Jayanti.

He emphasised on the ideals of service and renunciation.

His belief in Yuva Shakti was unwavering. pic.twitter.com/Wbx9nBlGkP

— Narendra Modi (@narendramodi) January 12, 2019

The thoughts and ideals of #SwamiVivekananda inspire and energise crores of Indians, particularly our youth.

It is from him that we draw the motivation of building an India that is strong, vibrant, inclusive and an India that takes global leadership in several areas.

— Narendra Modi (@narendramodi) January 12, 2019

बता दें स्वामी विवेकानंद का जन्म कलकत्ता (कोलकाता) के गौरमोहन मुखर्जी रोड के एक कायस्थ परिवार में 12 जनवरी 1863 को हुआ था. स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था, जो हिंदू धर्म के प्रचारक थे. हिंदू धर्म के प्रति उनका लगाव और इसे समझने की चाह उनमें इस कदर थी कि वह 25 साल की उम्र में ही घर-परिवार छोड़कर संन्यास की राह पर चल पड़े. स्वामी विवेकानंद की जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब वह 881 के अंत में रामकृष्ण परमहंस से मिले. रामकृष्ण परमहंस से मिलने के बाद ही नरेंद्रनाथ दत्त के 'स्वामी विवेकानंद' बनने का सफर शुरू हुआ.