उन्हें सदियों न भूलेगा जमाना, यहां जो हादसे कल हो गए। मालवा की मिट्टी में रचे बसे और तीन दशक तक इंदौर की हर नब्ज के जानकार रहे कलमकार महेंद्र बापना सोमवार को इस फानी दुनिया को अलविदा कह गए। एक सड़क हादसे ने इस हर दिल अजीज पत्रकार को हमसे छीन लिया। बापना अपनी जुझारू और बेबाक लेखनी के कारण शहर की अखबार बिरादरी में हमेशा सुर्खियों में रहते थे। ‘पत्रकारिता’ को नई ऊंचाइयां देने में उनका रोल किसी से छिपा नई हे। बचपन से साइकिल पर अखबार बांटने से लेकर अखबार की दुनिया का एक बड़ा नाम बनने तक का उनका सफर किसी मिसाल से कम नई। आज इंदौर के रीजनल पार्क मुक्तिधाम में जब उनका अंतिम संस्कार हुआ तो वहां कलमकारों के साथ सियासत और समाज से जुडेÞ दिग्गजों का जमावड़ा ये साबित कर रहा था कि लोगों के दिलो दिमाग पर उनकी छाप किस तरह थी। कलम के धनी इस शख्सियत को सूरमा का सलाम। अल्लाह उन्हें जन्नत बख्शे।