दूध पीना सभी के लिए जरूरी और फायदेमंद होता है। जब शिशु जन्म लेता है तो डॉक्टर भी उसे सबसे पहले मां का दूध पीने की सलाह देते हैं। दूध में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं। लेकिन आपको बता दें कि दूध जितना फायदेमंद होता है उतनी ही इसे पीते वक्त सावधानी भी बरतनी पड़ती है। क्योंकि गलत समय पर या गलत तरीके से दूध पीने से फायदे की जगह नुकसान झेलना पड़ सकता है। कुछ लोगों को दूध पीने से या दूध से बने उत्पाद खाने से एलर्जी या उल्टियां हो जाती है, इस लक्षण को साइंटिफिक भाषा में ग्लाक्टोसेमिया कहते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि यह क्या रोग है और इसके कारण, लक्षण व बचाव के तरीके क्या हैं।

हालांकि यह रोग बहुत कम बच्चों में पाया जाता है लेकिन अगर आपके बच्चे के साथ ऐसी परेशानी उत्पन्न हो जाये तो वक्त रहते इस पर काबू पा लेना चाहिए। दरअसल, ग्लाक्टोसेमिया यानि अतिदुग्धशर्करा होने के कई कारण हो सकते हैं। दूध या दूध से बने कई खाद्य पदार्थ में लेक्टोज नामक एंजाइम होता है। इस प्रकार के प्रोटीन से शरीर में एक अलग तरह की प्रक्रिया उत्पन्न होती है। इस एंजाइम पर लेक्टेस नामक दूसरा एंजाइम प्रक्रिया करता है जिससे ग्लूकोज  और ग्लेक्टोस बनते हैं। जब किसी व्यक्ति के शरीर में वह एंजाइम पर्याप्त मात्रा में नहीं होता जो ग्लेक्टोस को और आगे तोड़ सके तो यह रोग उत्पन्न होता है। धीरे धीरे ग्लेक्टोस का स्तर शरीर में बढ़ता जाता है जिससे पूरे शरीर में विष फैलने लगता है।

क्या हैं ग्लाक्टोसेमिया के लक्षण
यह रोग (एलर्जी) ज्यादातर बच्चों में, खासकर नवजात शिशुओं में पाया जाता है।

इस रोग के शिकार बच्चों में मिर्गी जैसे लक्षण देखने को मिल सकते है  
उल्टियां होना भी इस रोग का एक प्रमुख होता है
बच्चे में कमजोरी के लक्षण भी देखने को मिलते हैं
व्यक्ति की भूख मरना इस एक बड़ा लक्षण है।
इस रोग के शिकार बच्चे में जौंडिस के लक्षण भी देखने को मिलते है यानि उसकी आंखें पीली नजर आने लगती हैं।
इस रोग के शिकार बच्चे का मूत्र का भी रंग गहरा काला पड़ने लगता है।

ग्लाक्टोसेमिया के क्या नुकसान हैं
इसके शिकार व्यक्ति का लीवर बढ़ने लगता है
लीवर की कोशोकाएं एवं उत्तकों में भी खराबी आने लगती है  
इससे किडनी के फेल होने का जोखिम रहता है
इससे ब्रेन डेमेज होने का जोखिम रहता है

इस रोग का पता करने के तरीके
इस रोग का पता करने के लिए मूत्र की जांच की जाती है। अगर मूत्र में अमीनो एसिड्स या ब्लड प्लास्मा पाया जाता है तो आपके बच्चे को यह रोग हो सकता है।  

हेपाटोमेगली के द्वारा भी इस रोग की जांच की जाती है।

जलोदर या पेट में तरल पदार्थ की उपस्थिति से भी इस रोग के होने की पुष्टि की जाती है।

हाइपोग्लेसिमिया यानि ब्लड शुगर स्तर में असामान्य गिरावट से भी इस रोग को पहचाना जाता है

ग्लाक्टोसेमिया यानि अतिदुग्धशर्करा का उपचार क्या है

इसका उपचार बहुत मुश्किल से मिलता है। जिस दूध से आपके बच्चे को एलर्जी है उस दूध का सेवन करवाना तुरंत बंद कर दीजिये।

अपने बच्चे को डब्बे का दूध पिलाया करें (जिसमें लेक्टोज न हो)
अपने बच्चे को सोया का दूध पिलाया करें।

इस मामलें में योग्य चिकित्सक से मिलें।