जयपुर : राजस्थान के उप मुख्यमंत्री एवं राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा टोंक में दिए गए भाषण को पांच वर्षों की भाजपा सरकार की विफलता से उपजी उनकी हताशा का परिचायक बताया है। पायलट ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मोदी देश के प्रधानमंत्री होने के बावजूद अपने कार्यकाल के अंतिम पड़ाव पर भी जनता के प्रति अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करने के स्थान पर कांग्रेस पार्टी को कोस रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जिस तरह के बयान दिए हैं, उससे स्पष्ट हो गया है कि वे आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर पूरी तरह से निराश हो चुके हैं और फिर एक बार मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता प्रधानमंत्री से उनके द्वारा किए गए वादों का लेखा-जोखा मांग रही है जिसके विपरीत वह जनता को बरगलाने का काम कर रहे हैं। पायलट ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जितने भी दावे किए हैं उसमें जरा भी सच्चाई नहीं है, क्योंकि विगत पांच वर्षों में देश की आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा पर जिस स्तर पर समझौता हुआ है, उससे देश की जनता का विश्वास भाजपा सरकार से उठ चुका है।

उन्होंने कहा कि आज देश की अर्थव्यवस्था बेपटरी हो चुकी है, कानून-व्यवस्था लचर है और धरती पुत्र भाजपा के राज में आत्महत्या करने के लिए मजबूर हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमसे किसान ऋण माफी का हिसाब मांगने वाले प्रधानमंत्री बतायें कि उनके राज में क्यों किसानों को आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पायलट ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की प्रदेश सरकार की किसान कर्जमाफी योजना पर सवाल उठाए जबकि तथ्य यह है कि फरवरी से प्रारंभ की गई ऋण माफी योजना में पिछले 15 दिनों में 16 लाख 50 हजार किसानों के दो लाख रुपए तक की ऋणमाफी के छह हजार करोड़ रुपए के आवेदन अपलोड करने के बाद 11 लाख किसानों के आधार आधारित प्रमाणीकरण हो चुके हैं, जिनमें से आठ लाख किसानों के ऋणमाफी प्रमाण पत्र जारी भी हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने केवल 500 करोड़ की देशव्यापी कामधेनु योजना की बात कही जबकि राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने आरसीडीएफ को दूध आपूर्ति करने वाले किसानों को दो रुपए लीटर का वह बोनस देना पुन: चालू कर दिया है जिसे भाजपा की निवर्तमान सरकार ने बंद कर दिया था। पायलट ने कहा कि उज्ज्वला योजना की उपलब्धियां गिनाने वाले प्रधानमंत्री अच्छी तरह जानते हैं कि आधे से ज्यादा उपभोक्ता पुन: सिलेण्डर भरवाने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अच्छा होता कि प्रधानमंत्री सच्चाई स्वीकार कर लेते कि उनकी स्वीकार्यता व विश्वसनीयता अब खत्म हो चुकी है और कांग्रेस को कोसने से उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला है।