इस बार खां पत्रकारों के अधिमान्यता वाले कार्ड भोत लेट हो गए। वैसे ज्यादातर पत्रकारों के अधिमान्यता कार्ड तो आ चुके हैं। फिर भी जिला और स्टेट लेवल की अधिमान्यता वाले बहुत सारे पत्रकारों के कार्ड अभी तक डिलीवर नहीं हुए हैं। इस देरी पे जनसंपर्क वाले भी कोई तसल्लीबक्श जवाब नहीं दे पा रहे। पिछले कार्डो की दो साल की मियाद 31 दिसंबर 2018 को खतम हो गई थी। लिहाजा पत्रकारों ने अपने कार्डों के रिन्यूवल के लिए फिर से आॅनलाइन दरख्वास्तें दी थीं। सरकार ने इस दफे अधिमान्यता कार्ड बनाने का काम मुंबई की किसी फर्म को दिया है। कंपनी ऐसी शीट पे कार्ड छाप रही है जिसकी डुप्लीकेसी नहीं हो सकती। ये तो ठीक है बाकी आमतौर से कार्ड 31 जनवरी तक हर हाल में डिलीवर हो जाया करते थे। ये पेली बार है जब इत्ती देर हुई है। चुनावी बरस में इधर-उधर जाने पर पत्रकारों को अधिमान्यता कार्ड का बड़ा सहारा होता है। इसके अलावा मंत्रालय, सतपुड़ा-विंध्याचल में दाखिल होने के लिए भी ये कार्ड मददगार साबित होते हैं। उम्मीद है बाकी सहाफियों के कार्ड जल्द आएंगे।