क्राइस्टचर्च: न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर में हुए जनसंहार के मुख्य आरोपी ब्रेंटन टैरेंट ने हमले को फेसबुक पर लाइव दिखाया। वीडियो में वह कहता है, ‘‘चलो इस पार्टी को अब शुरू करते हैं।’’ वीडियो में दिख रहा है कि एक शख्स हाथ में बंदूक लेकर बड़े आराम से सैंट्रल क्राइस्टचर्च की अल नूर मस्जिद के अंदर घुसता है और ताबड़तोड़ गोलीबारी  कर  लाशों  के  ढेर  लगा देता है। खास बात यह है कि टैरेंट ने गुरुवार रात को ही फेसबुक पर पोस्ट के जरिए हमले की धमकी दे दी थी। उसने पोस्ट में लिखा था, ‘‘मैं फेसबुक के जरिए हमले की लाइव स्ट्रीमिंग तक करूंगा। अगर मैं हमले में नहीं बचता हूं तो आप सभी को अलविदा!

टैरेंट ने खुद का परिचय 28 साल के एक साधारण श्वेत शख्स के तौर पर बताया है जिसका जन्म एक निम्न आय वाले परिवार में हुआ था। उसने एक मैनीफैस्टो भी लिखा जिसका शीर्षक है- द ग्रेट रिप्लेसमैंट। ‘हमला क्यों किया’ इस शीर्षक के तहत उसने लिखा है कि यह विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा यूरोपीय देशों में हजारों लोगों की मौत का बदला लेने के लिए है। हमलावर बताता है कि उसके मन-मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली घटना यूरोपीय देशों में हुए आतंकी हमले हैं जिसके बाद उसने तय कर लिया कि लोकतांत्रिक, राजनीतिक हल की बजाय हिंसक क्रांति ही एकमात्र विकल्प है।

ब्रेंटन टैरेंट अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को अपना आदर्श मानता है जो उसके मुताबिक नई श्वेत पहचान के प्रतीक हैं और दोनों का सांझा उद्देश्य है। टैरेंट ने दावा किया है कि वह पहले कम्युनिस्ट था और बाद में अराजकतावादी बन गया। अब वह खुद को ईको-फासिस्ट बता रहा है।

37 पेज के दस्तावेज में टैरेंट ने दावा किया है कि वह पिछले 2 सालों से हमले की साजिश रच रहा था। उसने यह भी दावा किया है कि 3 महीने पहले ही उसने हमले वाली जगह का चुनाव किया था।

टैरेंट एंटी-इमिग्रेशन और अति दक्षिणपंथी समूहों का सदस्य है। उसने यह भी दावा किया है कि वह अति दक्षिणपंथी आतंकी एंडर्स ब्रीवीक के साथ संक्षिप्त संपर्क में था। ब्रीवीक ने 2011 में नॉर्वे के उटोया द्वीप पर 69 लोगों की हत्या की थी। बाद में उसने ओस्लो में कार बम के जरिए 8 अन्य लोगों को मारा था।

क्राइस्टचर्च शहर की जनसंख्या साल 2016 की जनगणना के अनुसार 3.75 लाख है। साल 2012 की रिपोर्ट के अनुसार भारतीयों की संख्या यहां 40000 थी। इस देश में मुस्लिमों की संख्या भी बढ़ रही है। हालांकि इस्लाम न्यूजीलैंड में एक नया और छोटा धार्मिक समुदाय है। मुस्लिम आप्रवासियों की संख्या बढऩे की वजह से न्यूजीलैंड में अब प्रमुख केंद्रों में मस्जिदें हैं, साथ ही इस्लामिक स्कूल भी हैं। न्यूजीलैंड में सबसे पहले मुस्लिम साल 1850 के दशक में क्राइस्टचर्च में बस गए थे।

बंदूकधारी मस्जिद में करीब दो मिनट रहा और वहां मौजूद नमाजियों पर बार-बार गोलियां दागीं। यहां तक कि उसने पहले ही दम तोड़ चुके लोगों पर भी ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। वहां से हमलावर सड़क पर निकला और पैदल चल रहे लोगों पर गोलियां बरसाईं।

टैरेंट ने कहा कि वह न्यूजीलैंड केवल इसलिए आया ताकि वह हमले की योजना तैयार कर सके और प्रशिक्षण दे सके। उसने कहा कि उसने न्यूजीलैंड को इसलिए चुना क्योंकि वह यह बताना चाहता था कि संसार का यह दूरदराज वाला क्षेत्र भी ‘बड़े प्रवास’ के लिए सुरक्षित नहीं है।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में मुख्य आरोपी टैरेंट ने उत्तर कोरिया और पाकिस्तान समेत कई देशों की यात्राएं की थीं और इस दौरान उसके अनुभवों ने उसे मौत का सौदागर बना दिया।

क्राइस्ट चर्च में मस्जिद पर हुए हमले के बाद न्यूजीलैंड में रहने वाले पंजाबी दहशत में हैं। न्यूजीलैंड की 2013 की जनगणना के मुताबिक देश में सिखों की आबादी 11,712 है जबकि हिन्दू आबादी 61,458 है। इनमें से अधिकतर नागरिक पंजाबी मूल के हैं।   कई लोगों ने शनिवार को गुरुद्वारा साहिब में लगने वाली पंजाबी की क्लास रद्द करवा दी है।  

इस हमले ने 5 अगस्त 2012 में अमरीका के विस्कॉन्सिन गुरुद्वारे में हुई फायरिंग की यादें ताजा कर दी हैं। इस हमले के दौरान 7 सिखों की मौत हो गई थी जबकि 4 अन्य घायल हो गए थे।