आजकल पत्रकारों की जो नई जमात है वो भोत जादा किसी एक संस्थान में नहीं टिकती। भोत हुआ तो दो या फिर तीन साल। कई बार तो एक या दो साल में ही लोग पाला बदल लेते हैं। इसका एक फायदा ये होता है कि पत्रकार का प्रोफाइल बदल जाता है। उसे मआली तौर पे भी खासा फायदा होता है। गोया के ‘ये माना पैसा खुदा नहीं, लेकिन खुदा की कसम खुदा से कम भी नहीं।’ भोपाल में चार बरस दैनिक भास्कर और तीन बरस पत्रिका में काम दिखाने के बाद महेंद्र गुप्ता ने सीधे दिल्ली की फिलाइट पकड़ी थी। भां पे इन्ने आजतक में एन्ट्री ली। तीन बरस आजतक में काम किया और अब महेंद्र मियां ने सीधे मुंबई का रुख किया। ये अब नवभारत टाइम्स मुंबई में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर हो गए हैं। टीवी एंकरिंग और रिपोर्टिंग का यंग चेहरा अमीता पटैरिया ने भोपाल में बंसल न्यूज, आईबीसी-24 और स्वराज एक्सप्रेस में काम किया। अमीता ने रायपुर का रुख किया और वहां हरिभूमि के चैनल आईएनएच में एंकरिंग कर रही हैं। वहीं इंदौर से भास्कर एनएनआर के भोपाल तबादले के बाद मशहूर काटूनिस्ट इस्माइल लहरी को भोपाल रास नहीं आ रहा था। उन्ने भास्कर इंदौर तबादला चाहा और और अब मियां खां वापस अपने शहर इंदौर पहुंच गए हैं। उधर खबर है कि अनुराग उपाध्याय के चैनल दखल न्यूज मे साधना के तीन बंदे ज्वाइन करने वाले हैं। आप सभी को इस बदलाव की मुबारकबाद।