लहजे में बदजुबानी, चेहरे पे नकाब लिए फिरते हैं, जिनके खुद के बही-खाते बिगड़े हैं वो मेरा हिसाब लिए फिरते हैं। समाजवादी पार्टी के बड़े नेता आजम खान की बदकलामी यूं तो जगजाहिर है। वो अभी तक तो दूसरे सियासी नेताओं के  किरदार पे बदतरीन तंज करते रहे हैं, लेकिन कल विदिशा में उन्ने मीडिया के साथ जो बदकलामी की वो कभी नहीं भुलाई जा सकती। दरअसल आजम अपनी पार्टी के राज्यसभा सदस्य चौधरी मुनव्वर सलीम के इंतकाल में शरीक होने विदिशा आए थे। वहां मौजूद पत्रकारों ने जयाप्रदा पर की गई उनकी अभद्र टिप्पणी के बारे में उनसे सवाल कर लिया। इत्ता सुनते ही मियां भाई हत्थे सेई उखड़ गए। जवाब देना तो दरकिनार इस बदजुबाने आजम ने पत्रकारों से कहा-आपके वालिद के इंतकाल में आया हूं...जी आपके वालिद मर गए हैं उनके जनाजे में शामिल होने आया हूं। ये जवाब सुनके पत्रकार हतप्रभ और गुस्से से भर गए। लेकिन ये नेता घमंड से भरी चाल चलता हुआ आगे बढ़ गया। आजम खान आज दिल्ली लौटने के लिए भोपाल एयरपोर्ट पहुंचे। यहां भी मीडिया ने उनकी कल की टिप्पणी पर सवाल दाग दिए। सपा नेता ने मीडिया की तरफ आंखें तरेरीं और कहा-मुझे आप लोगों से तहजीब सीखने की जरूरत नहीं है। चुनावों के दौरान एक जिम्मेदार नेता के मीडिया के  साथ इस सलूक की जित्ती मजम्मत की जाए कम है। जुबानी तौर पे तमाम नेता एकदूसरे पे हरकुछ तंज कर रहे हैं लेकिन पत्रकारों से इस कदर बदसलूकी का ये पहला मामला है। इस मामले पर मप्र श्रमजीवी पत्रकार संघ, मप्र पे्रस क्लब और भोपाल जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने गहरा ऐतराज जताया है। इन संगठनों की तरफ से आज पत्रकार धर्मेंद्र सिंह ठाकुर, अरशद अली खान, दिलीप भदोरिया और मप्र प्रेस क्लब के अध्यक्ष नवीन आनंद जोशी और पत्रकार सतीश सक्सेना मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मिलेंगे और आजम खान पे कार्रवाई की मांग करेंगे। घटना की शिकायत मुख्य चुनाव आयुक्त से भी की जा रही है। पत्रकार चाहते हैं कि सियासी नेताओं को मीडिया से मुखाबित होते वक्त जुबान की मर्यादा तय करने के लिए आचार संहिता के दायरे में लाया जाना चाहिए।