अगर भोपाल से साध्वी को ही उतारना था तो पार्टी ने इत्ती देर क्यों करी। बाकी प्रज्ञा भारती ने इसे धर्मयुद्ध कहा है तो दिग्विजय सिंह ने उनका स्वागत करते हुए सत्य अहिंसा की बात कही। यहीं कैलाश विजयवर्गीय के चुनाव ने लड़ने के  ऐलान वाला आईटम भी फिट हो गया। बाकी आजकल पाठकों को सियासी खबरें भोत अंदर न जाके दूसरे तीसरे पेज पे ही चाहिए। अखबार को इसे समझना चाहिए। चौक में आगजनी के बाद वहां संकरे रास्तों वाली खबर मौजूं रही। अखबार ने लिखा कि किशोर पे बाघ शावक ने हमला किया। एमसीयू के प्रोफेसरों ने अपने पर की गई एफआईआर की शिकायत उपराष्ट्रपति से की है। सूखता बड़ा तालाब और गंभीर जल संकट वाली खबर भेतरीन है। हमीदिया में वाहन चोरी की बढ़ती वारदातों वाली खबर भेतरीन रही। महासमर में हरदा टिमरनी की कांग्रेस में अहमियत वाली खबर ध्यान खींचती है। बाकी भोपाल से प्रज्ञा भारती की उम्मीदवारी, भोपाल से तीसरी महिला प्रत्याशी और दोनों बाहरी हैं भोपाल के लिए वाले आईटम खबर को मजबूती दे रहे हैं। वैभव श्रीधर लिख रहे हैं कि सियासी दलों को बेरोजगारों की फ़ौज नजर नहीं आती।