क्या लेंगे आप चाय या कॉफी, आप बैठिये साथ, बस इतना है काफी। वहां कॉफी के प्याले में कई बार तूफान आता है। बात निकलती है तो बहुत दूर तलक जाती है। इन दिनों सियासत गर्म है लिहाजा कॉफी की प्यालियों के कई-कई दौर हो रहे हैं। न्यू मार्केट का इंडियन कॉफी हाउस, कुछ नौजवान तो कुछ बुढ़ा चुके पत्रकारों का फेवरेट डेस्टिनेशन है। शहर के पर्यावरण, लॉ एंड आॅर्डर, पेट्रोल की कीमतों से लेकर इन दिनों चर्चा सियासत पर आकर ठहर गई है। फिर जब कांग्रेस से दिग्विजय सिंह उम्मीदवार हों तो उनकी जीत हार को लेके तमाम गणित यहां लगाए जा रहे हैं। भाजपा से साध्वी की उम्मीदवारी के बाद तो कॉफी हाउस के पत्रकारों की चर्चा का रुख ही बदल गया। पत्रकार इस चुनाव का पूरा एनालिसिस कर रहे हैं। धर्म और कथित राष्टÑवाद पे तो खासी हॉट चर्चाएं हो जाती हैं। इस सबके  बीच इन सहाफियों को ये उम्मीद भी है कि दिग्विजय सिंह कॉफी हाउस आकर अपनी उन्मुक्त हंसी के साथ गप्पें लगाने जरूर आएंगे। यूं कि जब वो सीएम थे और नहीं भी थे तब भी कॉफी हाउस आना उनका शगल था। यूं शिवराज भी कई बार वहां आए हैं। बाकी कमलनाथ को इत्ता वखत ही नहीं मिला के कॉफी हाउस की सीढ़ियां चढ़ते। कॉफी हाउस में पत्रकारों के  दो गु्रप हैं। गु्रप बोले तो कुछ पत्रकार सुबह आते हैं तो कुछ शाम को। सुबह आने वाले नीचे वाले फ्लोर पे एक कोने में बैठते हैं। इनमें एनडी शर्मा, राकेश दीक्षित, लेम्यूअल लाल, गौरव चंद्रा, रशीद किदवई, अनूप दत्ता और संजय सक्सेना खास हैं। वहीं शाम को आने वाले पत्रकारों के लिए कॉफी हाउस के फर्स्ट फ्लोर पे टी सिक्सटीन नंबर की टेबिल रिजर्व रहती है। वहां पत्रकार विजय तिवारी, अरुण दीक्षित, राज पाटीदार,नासिर हुसैन, विश्वंभर शुक्ला, संजीव आचार्य, अखिलेश दुबे शामिल हैं। कभी कदा एनके सिंह साब भी यहां आ जाते हैं। जाहिर है कई दफे कॉफी हाउस से खबरें थोक के भाव निकलती हैं।