नई दिल्ली : 30 मई से इंग्लैंड और वेल्स की धरती पर आसीसीई विश्व कप 2019 का आगाज होने वोला है। जिसे दुनियाभर के खेल प्रेमी वर्ल्ड कप के शुरू होने का बड़ी ही बेसब्री के साथ इंतजार कर रहे हैं। वही विश्व की टाॅप 10 क्रिकेट टीमें अपनी तैयारियों में लग गई है। जहा हर देश विश्व कप की ट्रॉफी में अपना नाम लिखा देखना चाहाती है। जिसमें टीम इंडिया भी प्रबल दावेदार मानी जा रही है। ऐसे में अगर भारत को विश्व कप इस बार भी जीतना चाहता है तो अपने प्लेन में ये 5 कारणों को सही तरीके से अपनाने होंगे। तो आइए एक नजर डालते हैं उन पांच कारणों पर जो टीम इंडिया को बना सकते हैं तीसरी बार वर्ल्ड चैंपियन।

बुमराह के अलावा भारत के पास स्विंग के दो उस्ताद भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी है। इंग्लैंड जैसी परिस्थतियों में ये दोनों भारत के लिए कारगर साबित हो सकते हैं। इन दोनों की ताकत सिर्फ स्विंग ही नहीं बल्कि इनकी तेजी भी है। स्विंग और तेजी का मिश्रण इन दोनों को खतरनाक बनाता है। इन तीनों के अलावा भारत के पास दो हरफनमौला खिलाड़ी हैं जो तेज गेंदबाजी करते हैं। हादिर्क पांड्या और विजय शंकर, लेकिन पांड्या का अंतिम-11 में खेलना तय है। पांड्या के पास इंग्लैंड में खेलने का अनुभव है। वो 2017 में खेली गई चैम्पियंस ट्रॉफी में टीम का हिस्सा था।

सिर्फ तेज गेंदबाज ही नहीं भारत के पास ऐसे स्पिनर भी हैं जो मध्य के ओवरों में मैच का पासा पलट सकते हैं और बड़े स्कोर की तरफ जाती दिख रही टीम को कम स्कोर पर रोक सकते हैं। हालिया दौर में चाइनमैन कुलदीप यादव और लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल की जोड़ी ने ऐसा कई बार किया है। भारत को दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में वनडे सीरीजों में जो जीत मिली उसमें इन दोनों का बहुत बड़ा रोल रहा है। ये दोनों मध्य के ओवरों में काफी असरदार साबित रहे हैं। इंग्लैंड में विश्व कप के दूसरे हाफ में गर्मी ज्यादा होगी और तब विकेट सूखे मिलेंगे जो स्पिनरों के मददगार होंगे। वहां कुलदीप और चहल का रोल बढ़ जाएगा। इन दोनों के अलावा भारत के पास रवींद्र जडेजा जैसा अनुभवी बाएं हाथ का स्पिनर भी है।

मजबूत तेज गेंदबाजी आक्रमण ही भारत की नई पहचान है और इसी के दम पर कोच रवि शास्त्री की टीम खिताब जीतने का दम भर रही है। 2015 में भारत ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था लेकिन उसके बाद बदलाव की हवा में भारत ने अपने गेंदबाजी आक्रमण को मजबूत किया। बीते तकरीबन दो साल में अगर देखा जाए तो भारत की अधिकतर जीत इन्हीं गेंदबाजों के दम पर है। विश्व कप में भारत के पास चार तेज गेंदबाज हैं। जसप्रीत बुमराह- जो डेथ ओवरों के विशेषज्ञ हैं। बुमारह में दम है कि वो रन रोकने के अलावा विकेट लेने में भी सफल रहते हैं।

ऐसा नहीं है कि भारत की बल्लेबाजी कमजोर है। टीम के पास कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन, महेंद्र सिंह धौनी जैसे दिग्गज है लेकिन कोहली के अलावा कोई भी बल्लेबाज निरंतर अच्छा नहीं कर सका है। यहां तक की हालत ये रही है कि अगर भारत के शीर्ष-3 बल्लेबाजों में से कोई एक भी नहीं चला तब भारत को 280-300 रनों के लक्ष्य को हासिल करना भी मुश्किल लगता है। बीते कुछ सालों में यह कई बार देखने को मिला है। हाल ही में भारत में ऑस्ट्रेलिया के साथ खेली गई वनडे सीरीज इस स्थिति का ताजा उदाहरण है।

कोहली पहली बार विश्व कप में कप्तानी कर रहे हैं। वहीं इंग्लैंड में यह तीसरा मौका होगा जब वह टीम की कमान संभालेंगे। इससे पहले 2017 में चैम्पियंस ट्रॉफी में और उसके बाद बीते साल इंग्लैंड के दौरे पर वह कप्तानी कर चुके हैं। इन दोनों मौकों से उन्होंने काफी कुछ सीखा होगा जो विश्व कप में वह शामिल करना चाहेंगे। नेतृत्व में कोहली की सबसे बड़ी ताकत धौनी का होना है। धौनी के पास दो वनडे विश्व कप और छह टी-20 विश्व कप में कप्तानी का बड़ा अनुभव है।

टीम: विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा (उप-कप्तान), शिखर धवन, लोकेश राहुल, केदार जाधव, महेंद्र सिंह धौनी (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल, दिनेश कार्तिक (विकेटकीपर), विजय शंकर, रवींद्र जडेजा।