महाविजय के महानायक। कैची हेडिंग के साथ भेतरीन जमावट हुई पेज की। भाजपा की तारीखी जीत, 17 राज्यों में भाजपा को 50 फीसदी से ज्यादा वोट वाले बक्से उम्दा रहे। चंदरबाबू नायडू की तो खां भोत भद पिटी। भाई विपक्षियों को एकजुट करने में लगे हुए थे। सूबे में इस दफे मालवा निमाड़ से लेके विंध्य,चंबल, बुंदेलखंड और मध्य क्षेत्र में भाजपा का लपक जादू चला। इसपे राजीव सोनी, रवींद्र कैलासिया की उम्दा खबरें आर्इं। भोपाल से प्रज्ञा की दिग्विजय की जीत और सिंधिया की गुना से हार चौंकाने वाली रही। अखबार लिखता है कि मोदी की टीम में मप्र का दबदबा कायम रहेगा। भोपाल में सन्यासी को राज, राजा हुआ बेताज वाली खबर जानदार रही। यहां जेल परिसर में दिग्विजय सिंह की पत्नी के साथ फोटू और जीत का प्रमाणपत्र लेतीं प्रज्ञा ठाकुर का आईटम भी है। उधर दिग्विजय सिंह की हार के बाद जिंदा समाधि लगाने का दावा करने वाला गायब हो गया है। मोदी फै क्टर और दिग्विजय सिंह की पुरानी छवि उनपे भारी पड़ गई।