पिछले दो महीनों से भयंकर भागादोड़ी। न्यूज रूम की किचान, खबरों को बेहतर से बेहतर देने का टेंशन और सियासी समीकरणों की खबरों से पत्रकारों को नतीजे आने के बाद अब जाके राहत मिली है। गोया के अखबार और चैनलों के सहाफी लंबे अरसे बाद रिलेक्स मूड में आ पाए हैं। इस दौरान भोपाल और भोपाल से बाहर सियासी कवरेज के लिए 44 डिग्री से ऊपर की भागदौड़ को भी विराम लग गया। लिहाजा बीती देर रात तक भोपाल के नतीजों, किस विस इलाके से किसको वोट वाले आईटम देते रहे रिपोर्टरों को सुबह की मीटिंग से छुट्टी भी मिली। और हां आज की मीटिंग में हर अखबार में दूसरे अखबारों से कंपेयर करने का सिलसिला भी चला। कहां चूक हुई, और क्या बेहतर किया जा सकता था इसपे चर्चा हुई। जिनने अच्छा काम किया उनकी तारीफ हुई और जो कुछ चूक गए उन्हें सुनना भी पड़ा। बाकी खां एक बात तो केना पड़ेगी। अक्सर फं्रट पेज की मेन खबरो की हेडिंग को लेके चर्चा में रेने वाले भास्कर ने हेडिंग पे कुछ खास काम नर्इं करा। आज जो हेडिंग दी गई ये तो खां हमारे अखबार मेंई कल छप चुकी हेगी। भास्कर के दो नंबर पेज वाली हेडिंग भी हमारे अखबार की हेडिंग की तरा सेम टू सेम हेगी। चलो कोई नी, होता है...।