मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने सूबे में नई गौशालाएं खोलने के 'प्रोजेक्ट गौशाला' पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. इस बाबत मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक महत्वपूर्ण बैठक भी की है, जिसमें पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव भी मौजूद रहे. इस बैठक में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रोजेक्ट गौशाला की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जो भी व्यक्ति या संस्था गौशाला खोलना चाहता है, उसे शासकीय भूमि उपयोग का अधिकार दिया जाए.

उन्होंने जिला पशु कल्याण समितियों का पुर्नगठन कर सभी ब्लाक में पशु कल्याण समिति गठित करने के निर्देश भी दिए. इस बैठक में पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 955 गौशालाओं का काम शुरू हो चुका है. उन्होंने बताया कि फिलहाल मध्य प्रदेश में 614 गौशालाएं चल रही हैं, जिनमें करीब एक लाख 60 हजार गायों को रखा गया है.

इस बैठक के दौरान सीएम कमलनाथ ने कहा, 'जो भी संस्थाएं इच्छुक हों, उन्हें शासकीय भूमि पर गौशाला खोलने के लिए भूमि उपयोग अधिकार दिए जाएं और प्रोजेक्ट गौशाला का विदेशों में NRI के बीच भी प्रचार किया जाए. प्रोजेक्ट गौशाला को लेकर सीएम कमलनाथ कितने गम्भीर है, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होनें बैठक में कहा कि गोपालन के लिए जो भी इच्छुक हैं, वो उनसे सीधे मिल सकते हैं. उन्होंने बैठक के दौरान ही पशुपालन विभाग को निर्देश दिया कि ऐसे इच्छुक लोगों को चिन्हित कर उनसे मिलवाया जाए.

इस दौरान बैठक में बताया गया कि पशु चारे के लिए अनुदान राशि 20 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है. इसके लिए जल्द ही बजट प्रावधान भी कर दिया जाएगा. सरकार के पशुपालन विभाग के मुताबिक 'प्रोजेक्ट गौशाला' से शहरों और गांवों में आवारा पशुओं को रहने की जगह तो मिलेगी ही, साथ में इससे आवारा पशुओं की वजह से होने वाले सड़क हादसों और खेतों में फसल के नुकसान को रोकने में भी मदद मिलेगी.