एक स्वतंत्र ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट में सामने आया है कि चीन ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए कैदियों की हत्या कर रहा है. लंदन स्थित चाइना ट्रिब्यूनल ने अपनी रिपोर्ट में खासकर फालुन गोंग आंदोलन से जुड़े लोगों को शिकार बनाए जाने की बात कही है.  

चाइना ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता सर जिओफ्रे नाइस क्यूसी ने किया. वे यूगोस्लाविया के अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल ट्रिब्यूनल के प्रॉसेक्यूटर रह चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत सारे लोगों की भयानक मौतें हुई जिनकी विवेचना नहीं हो पाई. लेकिन सभी एक ही तरह से मरे.

रिपोर्ट के अध्यक्ष जिओफ्रे ने कहा कि इसके कोई सबूत नहीं मिले कि कैदियों से जबरन अंग निकाला जाना बंद हो गया है. ट्रिब्यूनल को इस बात पर कोई शक नहीं है कि ये अभी भी जारी है.  ट्रिब्यूनल ने मेडिकल एक्सपर्ट, मानवाधिकार जांचकर्ताओं और अन्य से इस बारे में सबूत लिए. जिन लोगों की हत्या की गई, उनमें धार्मिक रूप से अल्पसंख्यक फालुन गोंग के सदस्य काफी थे. हालांकि, तिब्बती, वीगर मुस्लिम और इसाइयों से जुड़े सबूत बहुत कम मिले.

1999 में जब फालुन गोंग में लाखों लोग शामिल होने लगे तो इन्हें सजा दी जाने लगी. फालुन गोंग को कम्यूनिस्ट पार्टी अपने लिए खतरा समझने लगी थी. चीन ने 2014 में घोषणा की थी कि मौत की सजा पाने वाले कैदियों के अंग निकाले जाने की प्रक्रिया बंद कर दी गई है. चीन ने इन आरोपों को भी खारिज किया था कि राजनीति से प्रेरित होकर ऐसा किया जा रहा था.चाइना ट्रिब्यूनल का गठन ''इंटरनेशनल कोलिशन टू एन्ड ट्रांसप्लांट एब्यूज इन चाइना'' की ओर से किया गया था. इनके सभी सदस्यों ने बिना किसी पेमेंट के काम किया.

ट्रिब्यूनल ने यह भी पाया कि चीन के अस्पतालों में ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए वेटिंग समय बहुत कम है. कई बार यह सिर्फ कुछ हफ्ता होता है. जांचकर्ताओं की ओर से संपर्क किए जाने पर कुछ अस्पतालों ने कहा कि कुछ अंग फालुन गोंग के समर्थकों के हैं.इससे पहले चीनी जेलों से बाहर आने वाले फालुन गोंग और वीगर समुदाय के कुछ लोगों ने बताया था कि उनका कई बार मेडिकल टेस्ट किया गया था