अखबार का लेआउट कुछ ऐसा है कि खबरों की पेशकश की उठान नहीं हो पाती। सबकुछ पिटा पिटा सा लगता है। मसलन भोपाल में पुलिस हिरासत में युवक की मौत वाली खबर का हेडिंग से लेके लेआउट तक पिटा हुआ लग रहा है। लगता है अखबार में कोई सलीकेदार डिजाइनर नहीं है। सिटी पेज पे पुलिस की अमानवीयता की कहानी बयां करती खबर भरपूर आई। उधर सुल्तानिया में डाक्टर ड्यूटी से गायब रहे और गर्भवती महिला की मौत हो गई। गोया के पुलिस से लेके हेल्थ तक पूरा अबा का अबा ही खराब हो गया है। पल्लवी वाघेला बता रही हैं कि स्टेशन पर एक आटो ड्रायवर मोहम्मद जाहिद ने एक किशोरी को सकुशल थाने पहुंचा दिया।