दैनिक भास्कर में वे रिसर्च सेक्शन को देखते हैं। माथे पे तिलक और कई बार भगवा वस्त्र धारण करने वाले इस पत्रकार का नाम है रीतेश शुक्ला। पंडितजी वेद और उपनिषद के बड़े ज्ञाता है। उपनिषद का कान्सेप्ट है ‘आईये बैठ कर चर्चा करें’। लिहाजा इन्ने वेद और उपनिषद की इस सनातन परंपरा के तहत समाज के लोगों को चर्चा के जरिए अपने से जोड़ा। रीतेश शुक्ला यूं तो पंडित हैं लेकिन कर्मकांडी नहीं। ये उपनिषद की साइंटिफिक और जमीन की ईकॉलॉजी के लिए जरूरी परंपरा पर काम कर रहे हैं। लिहाजा इन्होंने उपनिषद में वर्णित ओम उपनिषद वन अभियान शुरु किया। बकौल शुक्ला उपनिषद में 27 नक्षत्र माने गए हैं। ओम उपनिषद वन में हम ओम के आकार के भूखंड पर 27 दरख्त रोपते हैं। इस अभियान की इब्तिदा राजीव नगर से कर दी गई है। ओम के आकार में पौधे लगाने पर वो हिस्सा छोटे से जंगल में बदल जाता है। उसकी देखरेख भी ठीक से हो जाती है। ओम वन जमीनी पानी को सहेजने और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी हैं। ये पक्षियों का भी ठिकाना बन जाते हैं। इसमें बरगद, पीपल और नीम के पेड़ भी होते हैं। बहुत उम्दा काम कर रए हो पंडितजी। मुबारकबाद आपको।