बच्चेदानी का कैंसर औरतों में दिनों-दिन बढ़ते चला जा रहा है। दुख की बात यह है कि इस बीमारी का पता लोगों को ज्यादातर लास्ट स्टेज में आकर चलता हैं, असल में महिलाएं इस बीमारी के शुरुआती लक्ष्णों को अनदेखा कर देती हैं जिसके चलते ओवेरियन कैंसर का इलाज अंसंभव हो जाता है। इस मामले में अच्छी बात यह है कि वैज्ञानिकों द्वारा एक ऐसे टेस्ट की खोज की गई है जिसकी मदद से औरतों में तेजी से फैल रही इस बीमारी पर समय रहते रोक लगाई जा सकती है। चलिए आज हम भी जानते  हैं इस टेस्ट और बच्चेदानी के कैंसर से रिलेटिड कुछ और बातें...

साइलेंट किलर है ओवेरियन कैंसर
टेस्ट के बारे में जानने से पहले यह जानना बहुत जरुरी है कि आखिर इस प्रॉब्लम को साइलेंट किलर क्यों कहते हैं ? असल में इस बिमारी का पता तब चलता है जब यह पूरे शरीर में फैल चुका होता है। कारण यह है कि इस कैंसर के कुछ खास लक्ष्ण नहीं होते। अक्सर माहवारी में हैवी ब्लीडिंग या फिर शरीर में सूजन की वजह से औरतों के डॉक्टर के द्वारा स्कैनिंग करवाने के लिए कहा जाता है। 85% औरतों को बच्चेदानी में रसौलियां होती हैं। इनमें से 30 से 40 प्रतिशत रसौलियां कैंसरस होती हैं। 100 में से 30 प्रतिशत औरतों को ही इस प्रॉब्लम का पता समय से पहले लग जाता है। बाकी 70 प्रतिशत ज्यादा देर तक जीवित नहीं रह सकती ।

ओविरियन कैंसर टेस्ट
स्वीडिश शोधकर्ताओं के अनुसार,नए रक्त परीक्षण में हमारे शरीर में से ग्यारह तरह के प्रोटीन लिए जाते हैं। उस खून की जांच सक्रीनिंग टूलस की मदद से बहुत बारीकी से की जाती है। जिससे कैंसर के बढ़ रहे सैल्स का बहुत जल्द पता चल जाता है। अल्ट्रासाउंड स्कैन के द्वारा बस रसौलियों के साइज के बारे में ही पता चलता है, लेकिन रसौली कैंसरस है या नहीं इसके लिए इस नए बल्ड टैस्ट की बहुत जरुरत होती है।

CA-125 टेस्ट
नए टेस्ट के अलावा कैंसर की जांच के लिए एक पुराना टेस्ट भी है जिसकी मदद से ओवरी में बढ़ रहे कैंसर की जांच की जा सकती है। इस टेस्ट की नार्मल रेंज 6 तक होती है। अगर आपका CA  लेवल 6 से अधिक जा रहा है इसका मतलब आप कैंसर के शिकार हो रहे हैं। अगर आपके परिवार में किसी नजदीकी को यह बीमारी रह चुकी है तो जरुरी है कि हर 6 महीने बाद इस टेस्ट के जरिए अपने खून की जांच करवाते रहें।

शोधकर्ताओं के विचार
प्रोफेसर गायलिनस्टेन के मुताबिक, बच्चेदानी के कैंसर की जांच के लिए सक्रीनिंग टेस्ट के रिजल्टस हमारे लिए काफी हैरानीजनक हैं। इस टैस्ट को जितना हो सके उतना प्रचार करना चाहिए ताकि कैंसर की इस प्रॉब्लम से समय रहते बचा जा सके। सही समय पर ओवेरियन कैंसर का पता चल जाने पर सर्जरी की जरुरत नहीं पड़ती। केवल कीमो थेरेपी द्वारा इसे कंट्रोल किया जा सकता है।  

वहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ गुटेनबर्ग के प्रफेसर करिन ने इस विषय में अपने विचार पेश करते हुए कहा कि, 'एक कैंसर का पता लगाने के लिए हमें 5 महिलाओं तक का ऑपरेशन या सर्जरी करनी पड़ती है। जब अल्ट्रासाउंड स्कैन द्वारा शरीर में असामान्यताओं का पता चलता है और कैंसर होने का संदेह होता है तो उस स्थिति में वर्तमान में यही (ऑपरेशन) सबसे सही विकल्प है। लेकिन अब एक ऐसे ब्लड टेस्ट की वाकई जरूरत है जो उन महिलाओं का पता लगा सके, जिन्हें सर्जरी की जरूरत नहीं है।' गौरतलब है कि अमेरिका में हर साल 7,500 महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का पता चलता है, जिनमें से 4,227 की मृत्यु हो जाती है।