नई दिल्‍ली: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्‍टी गवर्नर विरल आचार्य ने इस्‍तीफा दे दिया है. न्‍यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि आचार्य ने अपने कार्यकाल के खत्‍म होने से छह महीने पहले इस्‍तीफा दे दिया है. हालांकि आरबीआई के सूत्रों ने अभी तक उनके इस्‍तीफे की खबर की पुष्टि नहीं की है. कहा जा रहा है कि सोमवार दोपहर तक आरबीआई इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी कर सकता है.

Reserve Bank of India (RBI) Deputy Governor, Viral Acharya has resigned six months before the scheduled end of his term. He had joined RBI in 2017. (file pic) pic.twitter.com/RyxAt6fmAN

— ANI (@ANI) June 24, 2019

विरल आचार्य ने 2017 में आरबीआई को ज्‍वाइन किया था और उनका तीन साल का कार्यकाल जनवरी, 2020 में पूरा होना था. उनके इस्‍तीफे की पुष्टि होने की दशा में आरबीआई में शीर्ष स्‍तर पर दो पद खाली होंगे. आचार्य के इस्‍तीफे के बीच एनएस विश्‍वनाथन तीन जुलाई, 2019 को रिटायर हो रहे हैं. विरल आचार्य मौद्रिक नीति, रिसर्च और वित्‍तीय स्थिरता से जुड़े मामले देखते थे. विश्‍वनाथन बैंकिंग रेलुगेशन और रिस्‍क मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के इंचार्ज हैं.

इस तरह आरबीआई में छह महीने के भीतर ये दूसरा बड़ा हाई-प्रोफाइल इस्‍तीफा है. दिसंबर में गवर्नर उर्जित पटेल ने सरकार से मतभेदों के चलते अपने कार्यकाल खत्‍म होने के नौ महीने पहले इस्‍तीफा दे दिया था. उल्‍लेखनीय है कि सितंबर 2016 में उर्जित पटेल के गवर्नर बनने के बाद विरल आचार्य को उनकी जगह डिप्‍टी गवर्नर के रूप में नियुक्‍त किया गया था. उनका कार्यकाल तीन साल का था. उनके इस्‍तीफे के साथ ही आरबीआई में अब तीन डिप्‍टी गवर्नर बचे हैं- एनएस विश्‍वनाथन, बीपी कानूनगो और एमके जैन. आचार्य की नियुक्ति ऐसे वक्‍त हुई थी जब नोटबंदी के बाद धन जमा करने और निकासी के नियमों में लगातार बदलाव के कारण केंद्रीय बैंक की आलोचना हुई थी.

आरबीआई ज्‍वाइन करने से पहले विरल आचार्य अकादमिक क्षेत्र से जुड़े रहे हैं. वह न्‍यूयॉर्क विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे हैं और अपने आप को ‘गरीब व्यक्ति का रघुराम राजन’कहते हैं. वह वित्तीय क्षेत्र में प्रणालीगत जोखिम क्षेत्र में विश्लेषण और शोध के लिये जाने जाते हैं. आईआईटी मुंबई के छात्र रहे आचार्य ने 1995 में कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में स्नातक और न्‍यूयॉर्क विश्वविद्यालय से 2001 में वित्त में पीएचडी की है. वर्ष 2001 से 2008 तक आचार्य लंदन बिजनेस स्कूल में भी रहे.