पैरों में झनझनाहट महसूस होने पर अक्सर लोग उसे हिलाने लगते हैं, ताकि वो नार्मल स्थिति में आ जाए। वहीं कुछ लोग कुर्सी या सोफे पर, जहां भी बैठते हैं अपना पैर हिलाते रहते हैं लेकिन आपकी यह आदत रेस्टलेस लेग सिंड्रोम का संकेत भी हो सकती है क्योंकि इस बीमारी में पैर स्थिर नहीं रहते बल्कि दर्द के कारण या मानसिक स्थितियों के कारण अंजाने में ही हिलते रहते हैं। चलिए आपको बताते हैं कि क्या है रेस्टलेस लेग सिंड्रोम(RLS) और कैसे पाएं इस बीमारी से छुटकारा।
 
क्या हैं रेस्टलेस लेग सिंड्रोम?
दरअसल, यह एक नर्वस सिस्टम रोग है। पैर हिलाने पर शरीर में डोपामाइन हॉर्मोन का स्त्राव होने लगता है जिसके कारण व्यक्ति का मन बार-बार पैर हिलाने को करता है। इसे एक तरह का स्लीप डिसऑर्डर भी कहा जाता है। अक्सर नींद न पूरी होने की वजह से व्यक्ति थका हुआ महसूस करता हैं।

बीमारी के कारण
इसका मुख्य कारण शरीर में आयरन व मैग्नीशियम की कमी होता है। क्रॉनिक डिजीज जैसे डायबिटीज, मोटापा, रुमेटीइड अर्थराइटिस, पार्किंसंस रोग और फाइब्रोमायल्गिया के कारण भी आप इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।

गर्भवती महिलाओं में डिलीवरी के अंतिम दिनों में हॉर्मोन में बदलाव आने के कारण यह समस्या हो सकती है। इसके अलावा अधिक शराब का सेवन, जुखाम और एलर्जी की दवाओं को खाने से भी इस सिंड्रोम के चांसेज बढ़ जाते हैं। नींद की कमी, तनाव, धूम्रपान, शराब, व्यायाम की कमी, एलर्जी की दवाओं जैसे लाइफस्टाइल फैक्टर भी इस बीमारी को ट्रिगर कर सकते हैं।

किन-किन में देखी जाती है यह समस्या
जो लोग किसी तनाव के कारण पूरी नींद नहीं ले पाते वह इस बीमारी का शिकार होते हैं।
कई बार यह प्रॉब्लम ज्यादा देर काम करने वालों को अत्यधिक थकान होने के कारण भी हो सकती है।
महिलाओं में यह समस्या पीरियड्स के दौरान होने वाले लगातार दर्द के कारण नींद न पूरी होने के कारण होती है।
डायबिटीज और पार्किन्सन बीमारी से ग्रसित लोगों में भी यह प्रॉब्लम देखने को मिलती है।

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम के लक्षण
लगातार पैरों को हिलाना
पांवों में सनसनी महसूस होना
पैरों में दर्द व खिंचाव महसूस होना
सोते समय पांव चलाना
बार-बार करवट बदलना

पैरों में चुभन महसूस होना

कुछ लोगों में सिर्फ पैर हिलाने के लक्षण दिखते हैं और उन्हें दर्द या बेचैनी नहीं महसूस होती है। मगर इसका मतलब ये नहीं कि आपको इस बीमारी से कोई नुकसान नहीं होगा। दरअसल, दर्द न होने की स्थिति में भी उम्र बढ़ने के साथ-साथ आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

रेस्टलेस लेग सिड्रोंम का असर
इस बीमारी के लगातार बने रहने पर लोगों में अनिद्रा, चिड़चिड़ापन,सिरदर्द और फोकस की कमी प्रमुखता से पाई जाती है।

इलाज है संभव?
यह बीमारी ज्यादातर नींद पूरी न होने और आयरन की कमी के कारण होती है इसलिए इस बीमारी में आयरन और अन्य दवाएं दी जाती है, जिसे सोने से दो घंटे पहले लेना होता है। यह दवाएं नींद की बीमारी को दूर करके स्थिति को सामान्य करती है।

लाइफस्टाइल में सुधार करें
शराब-कैफीन से दूरी
शराब, कैफीन और तंबाकू से परहेज करें क्योंकि इसमें मौमजूद हानिकारक तत्व इस बीमारी को ट्रिगर करने का काम करते हैं।

नियमित व्यायम करें
नियमित व्यायम करने के साथ शारीरिक गतिविधियां करना भी बहुत जरूरी है। इसके साथ सोने से पहले सैर, स्ट्रेचिंग और व्यायम भी आरएलएस से लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं।

मैग्नीशियम से भरपूर डाइट
अपनी डाइट में अधिक से अधिक आयरन व मैग्नीशियम युक्त डाइट लें। इसमें आप चिकन, लीन मीट, सीफूड्स, वीट फ्लोर, पालक, फलियां आदि शामिल कर सकते है लेकिन कोई भी स्पेलीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

भरपूर नींद लें
कम से कम 8-9 घंटे की नींद लें ौर गुड़ स्लिपिंग हैबिट्स को फॉलो करें। नियमित नींद लेना, दिन के समय झपकी से बचना और सोने से पहले सैर करना जैसी अच्छी आदतों को अपनाएं।

हर्बल उपचार अजमाएं
जायफल में एक अद्भुत सुगंध और गुण होते हैं जो नर्व्स सिस्टम को रिलैक्स करते हैं। रात को बिस्तर पर जाने से पहले गर्म गाय के दूध में 1/8 चम्मच जायफल डालकर पीएं। इससे नींद अच्छी आती है। इसके अलावा सोने से पहले लैवेंडर एसेंशियल ऑयल, रोमन कैमोमाइल ऑयल को अंगूर के तेल या बादाम के तेल मे मिलाकर अपनी टांगो पर मालिश करें।

नियमित योगा करें
योग के जरिए आप रेस्टलेस लेग को आराम दे सकते है। एक अध्ययन में बताया गया कि सप्ताह में दो बार 90 मिनट योग किया जाए तो इससे नींद अच्छी आती है और मूड भी सही रहता है इसलिए आप भी रेस्टलेस लेग सिंड्रोम जैसी प्रॉबल्म से बचे रहना चाहते है तो डॉग पोज, वृक्ष मुद्रा, ट्री पोज अन्य आदि योगासन करें।

ओस्टियोपैथ थेरेपी
ऑस्टियोपैथी, मैनुअल थेरेपी का एक रूप है जो मांसपेशियों और जोड़ों को आराम देता है। इस विधि में पेल्विक टेंडर पॉइंट्स लगाया जाता है, जो आरएलएस और दर्द दोनों के लिए फायदेमंद है। इस थैरेपी को 90 सेकंड तक किया जाता है और आपका दर्द गायब हो जाता है। साथ ही इससे नींद भी अच्छी आती है।

नियमित मालिश करें
नियमित मालिश करके भी रेस्टलेस लेग सिंड्रोम से राहत मिलती है। शोध में बताया गया कि हफ्ते में दो बारा 45 मिनट टांगों की मसाज करने से नींद अच्छी आती है और टांगे स्वस्थ रहती हैं।