नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा की मौजूदगी में औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हो गए. अनुभवी राजनयिक और पूर्व विदेश सचिव जयशंकर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश मंत्री के तौर पर अपनी सरकार में शामिल किया है. उन्हें गत 30 मई को अन्य लोगों के साथ मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी. बीजेपी उन्हें गुजरात से राज्यसभा के लिये उम्मीदवार बना सकती है. उन्हें शपथ लेने के छह महीने के भीतर संसद के किसी भी सदन का सदस्य बनना होगा.

कौन हैं एस. जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर तमिलनाडु के रहने वाले हैं लेकिन उनका जन्म दिल्ली में हुआ. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एयरफोर्स स्कूल से की और फिर सेंट स्टीफेंस कॉलेज से आगे की पढाई की. जयशंकर ने पॉलिटिकल साइंस से एमए किया. फिर एम.फिल और पीएचडी भी किया. जयशंकर की शादी क्योको जयशंकर से हुई है और उनके दो बेटे और एक बेटी है.

64 वर्षीय जयशंकर 1977 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुए थे और उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और चेक गणराज्य में भारतीय राजदूत और सिंगापुर में उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया. इसके बाद 1981 से 1985 तक वे विदेश मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी रहे. 1985 से 1988 के बीच वे अमेरिका में भारत के प्रथम सचिव रहे और इसके बाद श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के राजनैतिक सलाहकार के तौर पर काम किया. 1990 में उन्हें बुडापेस्ट में कॉमर्शियल काउंसलर की पोस्टिंग दी गई.

इसके बाद जब वह भारत लौटे तो पूर्वी यूरोप के मामलों को देखते रहे. 1996 से 2000 तक टोक्यो और इसके बाद 2004 तक चेक रिपब्लिक में भारत के राजदूत का पद भी संभाला. चेक रिपब्लिक से लौटने के बाद वह तीन साल तक विदेश मंत्रालय में अमेरिकी विभाग देखते रहे. 2007 में उन्हें बतौर इंडियन हाई कमिश्नर सिंगापुर भेजा गया. फिर 2009 से 2013 तक वह चीन में भारत के राजदूत रहे.

भारत-अमेरिका और चीन के बीच कई समझौतों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
जयशंकर ने 2007 में यूपीए सरकार द्वारा हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते पर बातचीत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच देवयानी खोबरागड़े विवाद को सुलझाने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी.