भोपाल : किसान कर्जमाफी योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। मामला छतरपुर जिले में पूर्व मंत्री ललिता यादव के क्षेत्र की बड़ा मलहरा और वीडो सहकारी समितियों का है। समितियों के कर्मचारियों ने फर्जी तरीके से चार-चार करोड़ रुपए किसानों के नाम पर ऋण में चढ़ा दिए। इसका खुलासा तब हुआ जब किसानों को नोटिस जारी किए गए।

शून्य प्रतिशत ब्याज योजना में सबसे ज्यादा गड़बड़ी की शिकायतें छतरपुर जिले के सहकारी समितियों की आई हैं। यहां किसानों ने कई सहकारी समितियों की लिखित शिकायतें कलेक्टर और ब्लॉकस्तर पर गठित समितियों से की गई हैं। बड़ा मलहरा और वीरो सहकारी समिति की जांच कराई गई तो ये गड़बडिय़ां सामने आई हैं। अब सहकारिता विभाग ने छतरपुर जिले की सभी समितियों का स्पेशल ऑडिट कराने का निर्णय लिया है।

किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण बांटने के मामले में अब तक 40 से अधिक कर्मचारियों और प्रबंधकों पर पुलिस, लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में एफआइआर दर्ज कराई गई है। वहीं, किसानों के नाम पर कर्ज लेकर बाजार में ब्याज पर पैसे चलाने वाले 50 समिति प्रबंधकों और बैंक कर्मचारियों की जांच की जा रही है। इस मामले में 300 से अधिक कर्मचारी-अधिकारी संदेह के घेरे में हैं। इनसे पुलिस पूछताछ कर रही है। ये किसानों के बही-खाते में लोन ज्यादा चढ़ाकर रुपए ब्याज पर चलाते थे।

किसान कर्जमाफी के दौरान करीब 1000 शिकायतें जिला समिति के सामने आई हैं। किसानों की सबसे ज्यादा शिकायतें ये हैं कि जितना ऋण उन्होंने लिया था, उससे ज्यादा उनके खाते में चढ़ाया गया। जिनके नाम जमीन नहीं है, उनके नाम पर भी कर्ज बताया गया था। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि कब और कितना कर्ज उसके नाम पर लिया गया है। पूर्व में जमा कर्ज भी उनके नाम पर चढ़ा दिया गया। शिवपुरी, हरदा, ग्वालियर अलीराजपुर और सागर जिले में भी ऐसी शिकायतें आई हैं।

बड़ा मलहरा और वीडो समितियों में बड़ा घोटाला सामने आया है। दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस मामले में जांच भी चल रही है।
 डॉ. गोविंद सिंह, मंत्री, सहकारिता