दुबईः वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद सऊदी अरब तथा तुर्की के संबंध और बिगड़ते जा रहे हैं। तेल-समृद्ध सऊदी अरब में ‘हॉलीडे मैग्नेट' तुर्की का बहिष्कार करने की मांग बढ़ती जा रही है। लंबे समय से भूराजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे दो सुन्नी मुस्लिम दिग्गजों के रिश्ते इस्तांबुल में स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में खशोगी की हत्या के बाद और तनावपूर्ण हुए हैं।

इस घटना के बाद वली अहद (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान की वैश्विक स्तर पर छवि धूमिल हुई थी। हर वर्ष हजारों सऊदी पर्यटक तुर्की जाते हैं। लेकिन पत्रकार की हत्या के बाद से राष्ट्रवादियों और सरकार समर्थक मीडिया द्वारा तुर्की का बहिष्कार करने की मांग बढ़ती जा रही है। इससे तुर्की की संभवत: पहले से ही प्रभावित अर्थव्यवस्था और बेहाल हो रही है। कई मीडिया घरानों ने हाल ही में ‘‘ तुर्की मत जाओ '' और ‘‘ तुर्की सुरक्षित नहीं है '' की हेडलाइन्स का इस्तेमाल भी किया है।

वहीं अल-अरबिया चैनल सहित कई ने अंकारा में सऊदी दूतावास से, पासपोर्ट चोरी की बढ़ती घटनाओं और क्षुद्र अपराध को लेकर आधिकारिक चेतावनी भी जारी की है। सऊदी अरब के इस रूख का असर भी होता नजर आ रहा है क्योंकि तुर्की के पर्यटन मंत्रालय का कहना है कि 2019 के शुरूआती पांच माह के दौरान, पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में सऊदी अरब से आने वाले पर्यटकों की संख्या में 30 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है।