पूर्व मुख्यमंत्री के दौरों और छानबीन से अफसरों में हड़कंप
ऋषिकांत सक्सेना,भोपाल
: पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भोपाल के विकास के लिए  एक विजन डाक्यूमेंट तैयार किया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने दौरे भी शुरू किए हैं। मंगलवार को वह भोपाल को ताजमहल को देखने गए। चूंकि दिग्विजय सिंह की रुचि है इसलिए हैरिटेज स्थलों के विकास की नई प्लानिंग बनेगी। लेकिन अफसरों की परेशानी यह है कि इस प्लानिंग के साथ-साथ पुरानी फाइलें भी खुलेंगी। अगर ऐसा हुआ तो बड़ा भ्रष्टाचार सामने आएगा।

बड़ा सवाल: सरकार बदली अब क्या होगी जांच
15 साल बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई है। अब सवाल यह है कि हैरिटेज के नाम पर क्या करोड़ों रुपए के खर्चें की जांच होगी। पहले ऐसा लग रहा था कि यह मामला दब जाएगा। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने विजन डाक्यूमेंट में यहां के विकास पर फोकस किया है। जब नई फाइलें बनेंगी तो पुरानी फाइलों के भी खुलने की उम्मीद है। सवाल वही है कि क्या जांच होगी।

ताजमहल: पहले पर्यटन विकास निगम ने फूंके करोड़ों रुपए अब प्रायवेट को दिया
भोपाल के शाहजहांनाबाद क्षेत्र में स्थित ताजमहल को लेकर पहले पर्यटन निगम ने करोड़ों रुपए खर्च किए। पर इसमें काम कम करप्शन ज्यादा हुआ। बाद में  भाजपा सरकार ने ताजमहल को हैेरिटेज होटल के रूप में विकसित करने के लिए लीज पर दिया था। एक साल गुजरने के बाद भी रिनोवेशन शुरू नहीं हो पाया।   ताजमहल को लीज पर लेने वाली इंदौर की गोल्डमेन कंपनी ने यहां का काम शुरू नहीं किया है।

5 करोड़ फूंके, हैरिटेज के नाम पर चारागाह बनी सदर मंजिल
सदर मंजिल को मूल स्वरूप में लौटाने के नाम पर नगर निगम ने पहले लाखों रुपए खर्च किए। बाद में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट ने इसे चारागाह बना दिया। फिलहाल 5.80 करोड़ से इसका रेनोवेशन कराया जा रहा है लेकिन यह अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। जिस तरीके से स्मार्ट सिटी के अन्य कामों में करप्शन हो रहा है वैसे ही इस काम में भी हो रहा है।  योजना के मुताबिक मोती महल, सदर मंजिल का भीतरी हिस्सा, शौकत महल और इमामीगेट को भी संरक्षित कया जाना है। हैरानी की बात तो यह है कि आधे से अधिक बजट का हिस्सा खर्च होने के बाद भी यहां पर काम अधूरा है। पिछले साल तेज बारिश में सदर मंजिल का एक हिस्सा और गेट गिर गया था।