दक्षिण कश्मीर के पुलवामा का इलाका पिछले कई सालों से कश्मीर घाटी में आतंकवादी गतिविधियों का दूसरा नाम रहा है. बुरहान वानी, समीर टाइगर, जाकिर मूसा और पुलवामा हमले का फिदायीन आदिल भट्ट इसी इलाके से थे. पिछले साल के पुलवामा हमले के बाद अब इस इलाके की पहचान भी बदल रही है. 2019 की शुरुआत में यहां 30 से जायदा आतंकी सक्रिय थे जो सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन के बाद कम होकर 3 रह गए.दक्षिण कश्मीर के चार जिलों पुलवामा, शोपियन, कुलगाम और अनंतनाग में 119 आतंकी सक्रिय हैं जिनमें से 90 प्रतिशत लोकल और केवल दस प्रतिशत विदेशी हैं.

जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार पुलवामा जिले के अवंतीपोरा पुलिस डिवीजन में इस समय 18 आतंकी सक्रिय हैं. लेकिन यह सभी अब सम्बूरा और पाम्पोर इलाके में छुपने पर मजबूर हो गए हैं. सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के बाद त्राल का इलाका लगभग आतंक मुक्त हो गया है. 14 फरवरी को पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए CRPF के स्पेशल DG जुल्फिकार हसन ने इस बात की पुष्टि कर दी थी कि पुलवामा हमले के लिए जिम्मेदार सभी आतंकियों और उनके मददगारों को सुरक्षा बलों ने उनके अंजाम तक पहुंचाते हुए इलाके से जैश-ए मोहमम्द संगठन का पूरी तरह सफाया कर दिया है.

पुलवामा हमले की साजिश भी त्राल इलाके में रची गयी थी और इस हमले को अंजाम देने वाला आदिल भट्ट भी इसी इलाके का रहने वाला था. पिछले महीने सुरक्षा बलों ने हमले के आखिरी मास्टर माइंड कारी यासिर को उसके दो साथियों को एक साथ मार गिराया. जिस के बाद इलाके में जैश का पूरी तरह सफाया हो गया.

जम्मू कश्मीर पुलिस के कश्मीर के IG विजय कुमार के अनुसार सुरक्षा बलों ने जैश, लश्कर और हिजबुल के सभी टॉप कमांडर को मार गिरा कर आतंकियों की कमर तोड़ दी है. धारा 370 के हट जाने के बाद अवंतीपोरा में 6 मुठभेड़ हुई. जिनमें 14 आतंकियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया