प्रशासनिक संवाददाता, भोपाल: प्रदेश में संचालित योजनाओं को मर्ज करने और उनकी प्रासंगिकता को लेकर बनाई गई पांच अलग-अलग कमेटियों को रिपोर्ट अभी तक राज्य सरकार को नहीं मिली है। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सीएम कमलनाथ से चर्चा कर वित्त विभाग आगे की कार्रवाई करेगा।

वित्त विभाग द्वारा अलग-अलग विभागों की योजनाओं को बंद करने के लिए उनके मर्जर के प्रस्ताव विभाग प्रमुखों से पहले ही ले लिए गए थे। इसे अमलीजामा पहनाने के पूर्व राज्य शासन द्वारा बनाई गई समितियों में ऊर्जा, अधोसंरचना, कृषि और सहयोगी क्षेत्र, सामाजिक क्षेत्र, शिक्षा और स्वास्थ्य, अतिरिक्त राजस्व उपार्जन के उपाय के लिए पांच अपर मुख्य सचिवों की बैठक में कमेटा का गठन एक सप्ताह पहले किया गया। था। यह कमेटी को 18 फरवरी तक रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। कमेटियों के समन्वयक की जिम्मेदारी एसीएस एम। गोपाल रेड्डी, मनोज श्रीवास्तव, इकबाल सिंह बैंक्स, केके सिंह और अनुराग जैन को सौंपा गया था। साथ ही कमेटी में वित्त विभाग के अफसरों के साथ अलग-अलग विभागों के एक्सपर्ट अफसरों को भी शामिल किया गया है। सूत्रों का कहना है कि अभी तक इन अधिकारियों ने वित्त विभाग को अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। उन्हें रिपोर्ट देने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था। इसके आधार पर सीएम कमलनाथ से चर्चा कर आगे की कार्ययोजना पर विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि वित्तीय योजनाओं के समावेश के साथ वैकल्पिक वित्तीय संसाधनों की तलाश को लेकर भी दो दिन पहले राज्य सरकार ने एक्सपर्ट्स के सुझाव दिए हैं। उनके सुझावों को भी बजट में शामिल किया जाएगा।

15 वें वित्त आयोग को अतिरिक्त डिमांड का प्रस्ताव भेजने की तैयारी
उधर सरकार ने तय किया है कि केंद्रीय करों से मिलने वाले राजस्व में कटौती के बाद अब 15 वें वित्त आयोग से अतिरिक्त डिमांड की जाएगी। आयोग ने कहा है कि अंतिम रिपोर्ट बनने से पहले 31 तक राज्य सरकार डिमांड के प्रस्ताव भेज सकती है। इसलिए वित्त विभाग इस पर ध्यान कर रहा है कि आने वाले समय में केंद्र से अधिक राशि हासिल की जा सके।