चिरंजीवी हनुमानजी के जन्म स्थान और जन्मतिथि को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। एक मान्यता जो उत्तर भारत में अधिक प्रचलित है उसके अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी यानी दीपावली से एक दिन पहले हुआ था। बाल्मिकी रामायण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि मंगलवार के दिन स्वाती नक्षत्र में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन हनुमानजी का प्राकट्य हुआ था। जबकि एक अन्य मान्यता के अनुसार चैत्र शुक्ल पूर्णिमा तिथि को बजरंगबली का जन्म हुआ था। इस वर्ष यह तिथि 8 अप्रैल दिन बुधवार को है। इस तरह हनुमानजी का जन्मदिन पूरे देश 2 दिन मनाता है।

हनुमानजी को चोला चढ़ाने से पहले स्वयं स्नान कर शुद्ध हो जाएं और साफ वस्त्र धारण करें। सिर्फ लाल रंग की धोती पहने तो और भी अच्छा रहेगा। चोला चढ़ाने के लिए चमेली के तेल का उपयोग करें। साथ ही, चोला चढ़ाते समय एक दीपक हनुमानजी के सामने जलाकर रख दें। दीपक में भी चमेली के तेल का ही उपयोग करें।

चोला चढ़ाने के बाद हनुमानजी को गुलाब के फूल की माला पहनाएं और केवड़े का इत्र हनुमानजी की मूर्ति के दोनों कंधों पर थोड़ा-थोड़ा छिटक दें। अब एक साबुत पान का पत्ता लें और इसके ऊपर थोड़ा गुड़ व चना रख कर हनुमानजी को भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद उसी स्थान पर थोड़ी देर बैठकर तुलसी की माला से नीचे लिखे मंत्र का जप करें। कम से कम 5 माला जप अवश्य करें।

हनुमानजी को चढ़ाए गए गुलाब के फूल की माला से एक फूल तोड़कर, उसे एक लाल कपड़े में लपेटकर अपने धन स्थान यानी तिजोरी में रखें। इससे धन संबंधी समस्या हल होने के योग बनने लगेंगे।

अपने घर में पारद से निर्मित हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित करें। पारद को रसराज कहा जाता है। पारद से बनी हनुमान प्रतिमा की पूजा करने से बिगड़े काम भी बन जाते हैं। पारद से निर्मित हनुमान प्रतिमा को घर में रखने से सभी प्रकार के वास्तु दोष स्वत: ही दूर हो जाते हैं, साथ ही घर का वातावरण भी शुद्ध होता है। प्रतिदिन इसकी पूजा करने से किसी भी प्रकार के तंत्र का असर घर में नहीं होता और न ही साधक पर किसी तंत्र क्रिया का प्रभाव पड़ता है। यदि किसी को पितृदोष हो, तो उसे प्रतिदिन पारद हनुमान प्रतिमा की पूजा करनी चाहिए। इससे पितृदोष समाप्त हो जाता है।

सुबह स्नान आदि करने के बाद किसी हनुमान मंदिर में जाएं और राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। इसके बाद हनुमानजी को गुड़ और चने का भोग लगाएं। जीवन में यदि कोई समस्या है, तो उसका निवारण करने के लिए प्रार्थना करें।

महवीर हनुमानजी के बारे में कई ऐसी बाते हैं जो उन्हें सभी देवताओं से खास बनाते हैं। पौराणिक मत के अनुसार हनुमानजी महज एक ऐसे देवता हैं जो त्रेतायुग से लेकर आज तक और सृष्टि के अंत तक अपने शरीर के साथ इस धरती पर मौजूद हैं। तुलसीदासजी को इस बात का प्रमाण स्वंय हनुमानजी ने दिया है। धार्मिक मान्यता तो यह भी है कि जहां भी राम कथा होती है वहां हनुमानजी किसी ना किसी रूप में मौजूद रहते हैं।