नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) में अब नई टीम आ गई है. 22 महीने पहल सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त प्रशासकों की समिति (CoA) ने बीसीसीआई के नए संविधान के तहत चुनाव करा लिए हैं. इस दौरान बीसीसीआई और सीओए के बीच कई मामलों में मतभेद सामने आए. लेकिन किसी ने भी सीओए पर सीधा हमला नहीं बोला. अब जबकि इस समिति का अस्तित्व खत्म हो गया है. बोर्ड के कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी ने खुल कर पूर्व सीओए प्रमुख विनोद राय की आलोचना की है.

चौधरी का लगता है कि राय ने प्रशासकों की समिति के कार्यकाल के दौरान बोर्ड को नाकाम करते हुए उसकी आईसीसी में साख को भी नुकसान पहुंचाया है. चौधरी ने कहा कि राय के आईसीसी चेयरमैच शशांक मनोहर (Shashank Manohar) के साथ संबंध भारतीय बोर्ड के लिए महंगे साबित हुए.

हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में जब राय से पूछा गया कि क्या बीसीसीआई को 2014 के राजस्व मॉडल के तहत वह पैसे मिल गए हैं जिसका वादा किया था, तब उन्होंने कहा था कि यही सवाल उन्होंने (राय ने) चौधरी से भी पूछा धा. चौधरी ने इस मामले पर कहा कि वे इस बात केवल हंस ही सकते हैं कि पूर्व सीएजी को क्रिेकेट प्रशासन के बारे में कितनी कम समझ जानकारी थी. चौधरी ने कहा कि उन्होंने समझ में नहीं आया कि यह मुद्दा कहां से उठा. वे राय के इस बयान के बारे में अंदाजा नहीं लगा सकते.

चौधरी ने कहा, "उस पूरे इंटरव्यू में राय ने गलत तथ्य पेश किए जो हास्यास्पद हैं. राय ने इस इंटरव्यू में ऐसा क्यों कहा, यह मेरी समझ से परे है, और मैं इसकी वजह के बारे में क्यास भी नहीं लगाउंगा. राय की प्रतिक्रिया से उनकी इस मामले में समझ न होने की बात उजागर हो गई है.

अनिरुद्ध ने कहा, यह विडम्बना है कि पूर्व कैग को बीसीसीआई के राजस्व शाखा की मूलभूत समझ भी नहीं है और जिन्हें बीसीसीआई के प्रशासन की निगरानी करने की जिम्मेदारी तीन साल तक दी गई. वे इस मामले के मूल तथ्यों को भी समझ नहीं सके थे. इससे या तो अक्षमता साबित होती है या गलत जानकारी होना.

चौधरी ने कहा, "राय दो वित्तीय वर्ष में पैसों के हिस्से की उम्मीद कर रहे थे, यह तथ्य ही उनकी इस मामले में नासमझी को उजाकर करता है जो राहुल चौधरी जैसे सीईओ को हिदायत दे रहे थे. मैं व्यक्तिगत तौर पर पूर् कैग से यह अपेक्षा नहीं करता जिसने देश के नुकसान का आंकलन करने का काम किया हो." उन्होंने कहा कि जब राय यह सुनिश्चित कर रहे थे कि दोनों के बीच कोई संवाद न हो, पूर्व सीईओ अब भी शिकायत नहीं कर रहे हैं. राय ने मुझसे कभी कोई बातचीत नहीं की. ऐसा उनकी ओर से था मेरी ओर से नहीं, लेकिन मैं इसके लिए शुक्रगुजार हूं. इस मामले में यह हुआ था

यह तथ्य पेश किए चौधरी ने
1. 2014 में आईसीसी अधिकारों को लेकर नया मॉडल स्वीकार किया गया जो 2015-2023 तक के लिए था.
2. इस अधिकार चक्र का पहला बड़ा इवेंट आईसीसी वर्ल्ड टी20 था जो भारत में 2016 में हुआ था. उस समय शशांक मनोहर बीसीसीआई अध्यक्ष और आईसीसी चेयरमैन थे.
4. इस मॉ़डल के मुताबिक इवेंट का भुगतान ऑडिट से पहले ही होना था जिसके तहत बीसीसीआई को 2017 तक भुगतान होना था.
5. दुबई का वित्तीय वर्ष दिसंबर 31 को खत्म होता है इसलिए आईसीसी का 2016 का वित्तीय वर्ष 31 दिसंबर 2016 को खत्म हो गया था. इसके बाद आईसीसी के खातों का ऑडिट होना था जिसे 2017 में आीसीसी के बोर्ड को पास किया जाना था.
6. भुगतान बोर्ड की अनुमति के बाद होना था और अंतिम भुगतान 2017 में एजीएम के बाद होना था जहां अकाउंट पास होने थे.
7. इस तरह से 2014 के मॉडल के अधिकार चक्र का पहला भुगतान 2017 में आना था. उस समय सीओए के नियंत्रण में सब आ चुका था.
8 इस भुगतान को 2014-15 और 2015-16 में पाने की उम्मीद करना राय की इस मामले में समझ की कमी को साफ दर्शाता है जो उन्हें एक सीईओ की तरह हिदायत दे रहे थे.

चौधरी ने राय और शशांक के संबंधों को भी आड़े हाथों लिया. चौधरी ने राय के उस बयान का हवाला भी जिसमें राय ने कहा था कि उनके शशांक के साथ बढ़िया संबंध हैं. चौधरी के मुताबिक दोनों के संबंधों के कारण ही  आईसीसी बीसीसीआई को हल्के में लेने लगा और आीसीसी में बीसीसीआई की साख और रुतबा कमजोर होता गया.