चर्चित आध्यात्मिक गुरु भय्यू महाराज को ब्लैकमेल कर उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में जिला कोर्ट ने खास सेवादार की जमानत अर्जी शुक्रवार को खारिज कर दी है. जज एमके शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विनायक दुधाड़े (42) को जमानत देने से इंकार कर दिया.

दुधाड़े की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वह भय्यू महाराज का विश्वसनीय सेवादार रह चुका है और उसे उनकी आत्महत्या के सात महीने बाद झूठे आरोप लगाकर फंसाया गया है.

वहीं एजीपी अभिजीत सिंह राठौर ने याचिका पर सख्त आपत्ति जताते हुए दलील दी कि अलग-अलग लोगों ने अपने बयानों में कहा है कि दुधाड़े एक युवती और भय्यू महाराज के अन्य सहयोगी की मदद से उन्हें ब्लैकमेल कर रहा था.

राठौर के मुताबिक इन बयानों में यह बात भी सामने आई है कि ये आरोपी भय्यू महाराज को धमकी देते थे कि उन पर उसी तरह के आरोप लगाकर उनकी छवि खराब कर दी जाएगी, जिस तरह के आरोप एक स्वयंभू उपदेशक पर अन्य मामले में लगाए गए थे. पुलिस ने दुधाड़े के साथ भय्यू महाराज की निजी सचिव के रूप में काम कर चुकी पलक पुराणिक (25) और आध्यात्मिक गुरु के अन्य सहयोगी शरद देशमुख (34) को पिछले महीने गिरफ्तार किया था. फिलहाल तीनों आरोपी स्थानीय जेल में बंद हैं.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक भय्यू महाराज के नजदीकी रही एक युवती कथित तौर पर आपत्तिजनक चैट और अन्य निजी वस्तुओं के जरिए उन पर शादी के लिए दबाव बना रही थी जबकि आध्यात्मिक गुरु पहले से शादीशुदा थे. आध्यात्मिक गुरु के दो विश्वस्त सहयोगियों-दुधाड़े और देशमुख पर आरोप है कि वे भय्यू महाराज को ब्लैकमेल करने की साजिश में शुरूआत से शामिल थे और इस काम में युवती की लगातार मदद कर रहे थे.

गौरतलब है कि भय्यू महाराज (50) ने अपने बाइपास रोड स्थित बंगले में 12 जून 2018 को अपने लायसेंसी रिवॉल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी.