नई दिल्ली: गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन बिल (CAB) को ऐतिहासिक करार देते हुए सोमवार को कहा कि जनता ने बिल को मंजूरी दी है. उन्होंने कहा कि यह बीजेपी के घोषणापत्र का हिस्सा रहा है, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में देश के 130 करोड़ लोगों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाकर इसकी मंजूरी दी.

शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल को चर्चा और पारित करने के लिए रखते हुए कहा कि हम पूर्वोत्तर की स्थानीय संस्कृति और रीति रिवाज का संरक्षण करने के लिये प्रतिबद्ध हैं. गृह मंत्री ने कहा कि हम पूर्वेात्तर के लोगों का आह्वान करते हैं कि वे किसी उकसावे में नहीं आएं.

शाह ने कहा, ‘‘क्या केवल नेता के चेहरे, परिवार के नाम पर चुनाव लड़ने चाहिए.’’ शाह ने कहा कि यह विधेयक ऐसे लाखों करोड़ों लोगों को ‘नरक की यातना’ से निकालेगा जो पड़ोसी देशों से भारत आने पर मजबूर हुए और यहां उन्हें कोई भी अधिकार नहीं मिला है.

उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी के साथ अन्याय करने वाला नहीं, केवल न्याय करने वाला है. लोग 70 साल से इस न्याय का इंतजार कर रहे थे. गृह मंत्री ने विपक्ष के सदस्यों के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि बार-बार अल्पसंख्यकों की बात हो रही है तो क्या बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए शरणार्थी अल्पसंख्यक नहीं हैं जो धार्मिक आधार पर यातनाएं सहने के कारण वहां से भारत आए.

अमित शाह बोले- कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश विभाजन किया इसलिए नागरिकता कानून में संशोधन की जरूरत पड़ी

उन्होंने कहा कि संविधान सभा ने पंथ निरपेक्षता की बात कही थी, हम उसका सम्मान करते हैं और उसे आगे ले जाने के लिए उत्सुक हैं. उन्होंने कहा कि किसी के भी साथ धार्मिक आधार पर दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए.

शाह ने कहा कि घुसपैठियों और शरणार्थियों की अलग पहचान करना भी जरूरी है. गृह मंत्री ने कहा कि राशन कार्ड या किसी दस्तावेज के बिना भी शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी. उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस के सदस्य साबित कर दें कि विधेयक भेदभाव करता है तो मैं विधेयक वापस ले लूंगा.’’

गृह मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों को आक्रान्तित होने की जरूरत नहीं है. ईस्ट फ्रंटियर रेगुलेशन से अरुणाचल संचालित होता है. मणिपुर को हम इनर लाइन परमिट के तहत ला रहे हैं. पूरे नॉर्थ ईस्ट की चिंताओं का निराकरण है. किसी उकसावे में आने की जरूरत नहीं है.

अमित शाह के बयान के बाद कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 के खिलाफ है.हम शरणार्थियों के खिलाफ नहीं है. उनके लिए व्यापक कानून लाइए.