भोपाल: कोरोना संकटकाल के बीच प्रदेश की शिवराज सरकार द्वारा एस्मा लगाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सवाल उठाए है।कमलनाथ ने ट्वीट करके शिवराज के इस फैसले पर सवाल खड़े किए है।कमलनाथ ने ट्वीट कर लिखा है कि कोरोना महामारी के इस दौर में प्रदेश में सभी शासकीय डॉक्टर्स,मेडिकल स्टाफ़,अधिकारी -कर्मचारी बेहद ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर प्रदेश की जनता के हित में रात-दिन कार्य कर रहे है,संकट की इस घड़ी में सब एक है,ऐसे में प्रदेश में “ESMA“ लागू का निर्णय,क़ानून का भय,समझ से परे ?

दरअसल, मध्यप्रदेश में कोरोना के चलते लॉकडाउन के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश में अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून  लागू कर दिया है।शिवराज ने ट्वीट कर लिखा है कि शिवराज सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा-नागरिकों के हित को देखते हुए कोरोना के बेहतर प्रबंधन के लिए आज से सरकार ने मध्यप्रदेश में एस्मा लागू कर दिया है। एसेंशियल सर्विसेज़ मैनेजमेंट एक्ट जिसे ESMA या हिंदी में ‘अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून’ कहा जाता है, तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।

 

कोरोना महामारी के इस दौर में प्रदेश में सभी शासकीय डॉक्टर्स,मेडिकल स्टाफ़,अधिकारी -कर्मचारी बेहद ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर प्रदेश की जनता के हित में रात-दिन कार्य कर रहे है,संकट की इस घड़ी में सब एक है,ऐसे में प्रदेश में “ESMA“ लागू का निर्णय,क़ानून का भय,समझ से परे ?

— Office Of Kamal Nath (@OfficeOfKNath) April 8, 2020

 

बता दे कि इस महामारी के चलते सरकारी व्यवस्था बिगड़ न जाए इसे लेकर एस्मा लागू किया गया है। इसके तहत अब अति आवश्यक सेवा से जुड़े कर्मचारी और अधिकारी अवकाश या हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे। इस कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इस कानून के लागू होने के बाद सरकार को हड़ताली कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए कई प्रकार के अधिकारा प्राप्त हो गए हैं।

एस्मा कानून संसद द्वारा पारित अधिनियम है, जिसे 1968 में लागू किया गया था। हड़ताल को रोकने के लिए यह कानून लगाया जाता है। एस्मा लागू करने से पहले इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को समाचार पत्र या अन्य माध्यमों से सूचित किया जाता है। यह कानून अधिकतम छह माह के लिए लगाया जा सकता है। इसके लागू होने के बाद यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाता है तो वह अवैध और दण्डनीय है। कानून का उल्लंघन कर हड़ताल पर जाने वाले किसी भी कर्मचारी को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है।