शादी के बाद लड़की के लिए पति के अलावा सास-ससुर ही सबकुछ होते हैं। भारतीय लड़कियों के मन में सास-ससुर की छवि को लेकर बहुत सी धारणाएं होती है, जोकि काफी हद तक सही भी होती है। मगर, हाल ही में एक सास-ससुर ने अपनी 31 वर्षिय विधवा बहू का विवाह करवाकर एक मिसाल पेश की है। इस बुजुर्ग दंपत्ति की दरियादिली से हर कोई हैरान है।

दरअसल, सरकाघाट उपमंडल के रहने वाले बुजुर्ग संतोषी देवी और ब्रह्मदास ने अपने छोटे बेटे नरेश कुमार की शादी की थी। मगर, शादी के 23 दिन बाद ही उसका सुहाग उजड़ गया। नरेश कुमार सेना में जैक राइफल में थे। उसकी 9 अगस्त, 2016 को छुट्टी में घर आते दौरान सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।

पति की मौत के बाद उनकी बहू टूट चुकी थी लेकिन जैसे-तैसे अकेलेपन में अपनी जिंदगी काट रही थी। मगर, बुजुर्ग दंपत्ति से अपनी बहू का यह अकेलापन देखा नहीं जा रहा था। बेशक वह भी अपने बेटे की असमय मौत से टूट गए लेकिन उन्होंने अपनी बहू का संसार फिर से बसाने का फैसला किया।

उन्होंने हमीरपुर के चबूतरा गांव निवासी नरेंद्र कुमार पुत्र फितूरी राम के साथ अपनी बहू का रिश्ता करवाया। शादी की तारीख तय की गई थी और दोनों बुजुर्ग दंपत्ति ने अपने सगे संबंधियों के साथ घर पर बारात का स्वागत किया। सास-ससुर ने बहू को बेटी बनाकर पूरे विधि विधान से पुनर्विवाह व कन्यादान किया।

यही नहीं, सास बिमला देवी ने भी बहू को बेटी मानते हुए उसे शादी पर जहां लाखों की राशि दी, वहीं उन्हें बेटे की लगी सेना पेंशन को भी सभी ओैपचारिकताएं पूरी कर उसके नाम कर दिया। वहीं ससुर दास का कहना है कि न तो इंसान को पैसे का लालच करना चाहिए, न ही बहू-बेटियों को तंग किया जाना चाहिए। इसीलिए वह लोगों को भी इसको लेकर संदेश दे रहे हैं।

इस दंपत्ति ने अपनी बहू की शादी कर एक मिसाल पेश की है बल्कि लोगों को एक खास संदेश भी दिया है कि सास-ससुर भी मां-बाप बन सकती हैं। उनकी इस नेक सोच को हर कोई सलाम कर रहा है और पूरे देभ में उनकी खूब प्रशंसा भी हो रही है।