अखबार के पहले पन्ने में  आज कु छ नया नजर नहीं आ रहा है। तकरीबन सभी  खबरें बिना चमक की लगती हैं जिनमें न तो कोई पैनापन नजर आता है और न ही कोई इनपुट वर्किंग।  राम जन्मभूमि की सुनवाई से लेकर लोकायुक्त पुलिस के हत्थे चढ़े सहायक आयुक्त आबकारी आलोक खरे की खबरों में सिर्फ खानापूर्ति नजर आती है। मैग्नीफिसेंट एमपी भी आज कसावट की मांग रहा है। आधे शहर में पानी की किल्लत जरूर मजबूती से डटी है। वजह साफ है कि गलत प्लानिंग का दौर अभी थमा नहीं है जिससे लोग पानी के लिए हलाकान हो रहे हैं।  मैनिट में सीबीआई का छापा, अवैध भुगतान के आरोप में कार्रवाई की खबर निगाहेआम होती है तो दूसरी तरफ दो निगम के मामले में दावे आपत्ति के बीच रुकता शहर का विकास भी नजर आता है। हमीदिया के गेट पर सुरक्षाकर्मियों के होने के बाद भी डॉक्टर को चाकू मारने की खबर चिंता वाली है क्योंकि अगर यही होना है तो फिर किस बात की वहां पर हो रही है सुरक्षा।