कोरोना का मतलब कोई रोड पे ना निकले। मोदी जी के तीन हफ्ते के टोटल लॉकडाउन के आव्हान को लोग मानेंगे तो जरूर लेकिन जिस तरह से सरकार धीरे धीरे लॉकडाउन की मियाद बढ़ाती जा रही है उससे आने वाले दिनों में हालात बद से बदतर होते जाएंगे। अभी तो लोेगों के घरों में खाने पीने क ा सामान है बाकी जब इसकी आपूर्ति ही नहीं होगी असली हाहाकार तो तब मचेगा। इसकी तैयारी की जरूरत है। नवदुनिया सहित हर अखबार पाठकों को ये बता रहा है कि अखबार से कोई वायरस नहीं फैलता। बाकी अल्लाई बेहतर जानता है कि उनके दावे कित्ते सच हैं। कोरोना से सचेत रहने को लेकर डाक्टरों के मश्वरे उम्दा सेट हुए। बीएमएचआरसी को कोरोना के मरीजों को अधिग्रहीत करने से मरीजों के हंगामे वाली खबर भी यहां है। संक्रमणकाल के बीच लोगों की सेवा करने वालों वाली खबर अनुकरणीय है। लॉकडाउन के बीच बाहर निकलने वालों पे पुलिस की सख्ती वाली खबर भी यहां है। बाकी जित्ती सख्ती की जानी चाहिए वो दिखाई नहीं देती। रवींद्र कै लासिया बता रहे हैं कि कांग्रेस में एक और फूट हो सकती है।