दुनियाभर में हर साल एचआईवी से संक्रमति लोगों व अन्य लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरुक करने के लिए हर साल 1 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे मनाया जाता है। एड्स बहुत ही खतरनाक बीमारी है। विश्व स्तर पर एड्स डे मनाने की शुरुआत WHO से जुड़े जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस नेटर नाम के व्यक्तियों ने अगस्त 1987 में की थी। एड्स की बीमारी कभी भी किसी व्यक्ति को छूने से नहीं फैलती है बल्कि यह संक्रमति व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई कुछ चीजों का प्रयोग करने से फैलती है।
 
क्या है एड्स
एचआईवी एक संक्रमित विषाणु है। यह व्यक्ति के शरीर में जाकर खून में मौजूद श्वेत रक्त कोशिकाओं यानि की व्हाइट सेल में मिल जाता है। जिससे व्हाइट सेल के माध्यम से वायरस व्यक्ति के डीएनए में चला जाता है। ऐसे में वायरस टूट जाते है और वह व्हाइट सेल्स पर आक्रमण करने लगते है।जिससे धीरे-धीरे शरीर में व्हाइट सेल खत्म हो जाते है। एचआईवी से संक्रमित होने के बाद एड्स की बीमारी होने में काफी साल लग जाते है।

कैसे होता है एड्स
HIV पॉजिटिव से असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने से।
HIV मरीज के शरीर में इस्तेमाल किए हुए इंजेक्शन को दूसरे व्यक्ति में इस्तेमाल करना और किसी की इस्तेमाल किए हुए इंजेक्शन का इस्तेमाल करना।
पीड़ित व्यक्ति का खून दूसरे व्यक्ति को चढ़ाने से।
गर्भवती महिला में एचआईवी का वायरस होने से बच्चे में यह वायरस आ सकता है।
पीड़ित मां द्वारा बच्चे को स्तनपान करवाने से।
पीड़ित व्यक्ति का ब्लेड इस्तेमाल करने से।

एचआईवी के लक्षण
शुरुआती दिनों में तो इसके किसी भी तरह के लक्षण नजर नहीं आते है। व्यक्ति पूरी तरह से सेहतमंद और स्वस्थ दिखाई देता है लेकिन कुछ सालों बाद शरीर में बदलाव आने लगता है और यह लक्षण दिखाई देते है।

बुखार का रहना
शरीर में थकावट महसूस करना
सूखी खांसी
वजन का कम
स्किन, मुंह, आंखों के नीचे या नाक पर धब्बे पड़ना
समय के साथ याददाश्त कमजोर होना
शरीर में दर्द रहना

एड्स से जूडे भ्रम
बहुत से लोगों को लगता है कि एड्स की बीमारी एड्स से पीड़ित व्यक्ति के साथ खाने, पीने, उठने बैठने से हो जाती है जो कि पूरी तरह से गलत है। सच तो यह है कि यह लोगों रोज के कामों के दौरान संपर्क में आने से नहीं फैलती है जैसे कि

पीड़ित के साथ खाने-पीने से
बर्तनों की साझीदारी से
हाथ मिलाने या गले मिलने से
एक ही टॉयलेट का प्रयोग करने से
मच्छर या अन्य कीड़ों के काटने से
पशुओं के काटने से
खांसी या छींकों से
 
एड्स से बचाव के उपाय
एड्स में एंटी रेट्रोवाइरल थेरेपी दवाइ का उपयोग किया जाता है। यह एचआईवी के प्रभाव को कम करके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। इसके साथ ही कुछ बातों का ध्यान रख कर इससे बचाव किया जा सकता है।

पीड़ित साथी और व्यक्ति के साथ संबंध नहीं बनाने चाहिए।
खून चढ़ाने से पहले पूरी तरह से जांच करें।
किसी की उपयोग की हुी सुई या इंजेक्शन का प्रयोग न करें।
दाढ़ी बनवाते समय हमेशा नए ब्लेड का इस्तेमाल करें।