नई दिल्ली : नागरिकता संशोधन एक्ट के मसले पर जनता दल (यू) के उपाध्यक्ष और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर लगातार मोर्चा खोले हुए हैं. बुधवार को एक बार फिर प्रशांत किशोर ने ट्विटर के जरिए इस मसले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा और कहा कि वो विरोध की परवाह नहीं करते तो CAA, NRC लागू करने पर आगे बढ़ें. बता दें कि मंगलवार को ही अमित शाह ने चुनौती दी थी कि केंद्र सरकार CAA पर बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेगी.

जदयू नेता प्रशांत किशोर ने बुधवार को ट्वीट कर लिखा, ‘नागरिकों की असहमति को खारिज करना किसी भी सरकार की ताकत को नहीं दर्शाता है. अमित शाह जी, अगर आप CAA, NRC का विरोध करने वालों की फिक्र नहीं करते हैं तो फिर आप इस कानून पर आगे क्यों नहीं बढ़ते हैं. आप कानून को उसी तरह लागू करें जैसे की आपने देश को इसकी क्रोनोलॉजी समझाई थी.’

Being dismissive of citizens’ dissent couldn’t be the sign of strength of any Govt. @amitshah Ji, if you don’t care for those protesting against #CAA_NRC, why don’t you go ahead and try implementing the CAA & NRC in the chronology that you so audaciously announced to the nation!

— Prashant Kishor (@PrashantKishor) January 22, 2020

बता दें कि भले ही जदयू ने राज्यसभा, लोकसभा में इस कानून के पक्ष में मतदान किया हो लेकिन प्रशांत किशोर लगातार इसपर अलग राय रख रहे हैं. उन्होंने ट्विटर से ही इस कानून के खिलाफ मोर्चा खोला, अपनी पार्टी के पक्ष पर भी सवाल खड़े किए और अन्य विपक्षी दलों से इस कानून के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने को कहा.

प्रशांत किशोर के लगातार विरोध के बाद ही बिहार में नीतीश कुमार ने ऐलान किया था, उनके राज्य में नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजन लागू नहीं होगा. इसके अलावा उन्होंने विधानसभा में CAA पर चर्चा करने की भी वकालत की थी.

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नागरिकता संशोधन एक्ट के समर्थन में लखनऊ में सभा की. इस दौरान अमित शाह विरोधियों पर जमकर बरसे और कहा कि कोई कितना भी प्रदर्शन या विरोध कर ले, लेकिन मोदी सरकार CAA पर पीछे नहीं हटेगी. इसी के बाद अब प्रशांत किशोर का जवाब आया है.

नागरिकता कानून आने के बाद से ही देश के कई हिस्सों में इसके खिलाफ विरोध हो रहा है. दिल्ली के शाहीन बाग में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी पिछले करीब 40 दिनों से सड़क पर डटे हुए हैं और हटने का नाम नहीं ले रहे हैं. अब दिल्ली के अलावा लखनऊ, इलाहाबाद, पटना, गया समेत कई शहरों में इस तरह का विरोध शुरू हो गया है.