नई दिल्ली: देश में लड़कियों की शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने समय की मांग के अनुसार बच्चियों और लड़कियों को पर्याप्त अवसर मुहैया कराने की जरूरत पर जोर दिया. उनका कहना था कि इन्हें प्रत्येक क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी बनाने और आगे बढ़ने में मदद करने की जरूरत है. वह मंगलवार को यहां ओ.पी. जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय की स्थापना दिवस के साथ सातवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने कहा, हम लड़कियों की शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं. अब परिवर्तन होना चाहिए, महिलाओं को उनका हक मिलना चाहिए. अगर आप उन्हें पर्याप्त अवसर मुहैया कराएंगे तो वह आगे बढ़ेंगी. नायडू ने कहा, मेरी देशवासियों से अपील है कि हमें बालिकाओं की शिक्षा का प्रसार विशाल तरीके से करना चाहिए. उन्हें आगे आने और प्रतिस्पर्धा करने की इजाजत देनी चाहिए. हमें आशा है कि भविष्य में लोगों को अपनी क्षमता का अहसास होगा और वह उन्हें ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहन और उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेंगे.

देश में मौजूदा समय की परेशान करने वाली घटनाओं का जिक्र करते हुए नायडू ने कहा, जो भी देश में हो रहा है वह निराशाजनक है. किसी देश पर हमला करने का हमारा इतिहास नहीं है. हम पर अतीत में कई शासकों द्वारा शासन किया गया लेकिन हमारी संस्कृति हमेशा शीर्ष पर रही. हमें संस्कृति को सहेज कर रखना चाहिए. उपराष्ट्रपति ने कहा, हमें सभी लोगों के कल्याण और एक परिवार की तरह सभी के साथ अच्छे बर्ताव पर ध्यान देना चाहिए.

नायडू ने कहा कि 65 प्रतिशत भारतीय 35 वर्ष से कम उम्र के हैं जो अवसरों और चुनौतियों दोनों को प्रस्तुत करते हैं. हमें अपने युवाओं की आकांक्षा को पूरा करने की जरूरत है. इसके लिए हमारी मूल शिक्षा प्रणाली को फिर से उन्मुख किया जाना चाहिए. सरकारों को कौशल उन्नयन पर भी अधिक ध्यान देना चाहिए. हमारे देश में विशाल प्रतिभा है, लेकिन इसकी पहचान और इसे प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है. नायडू ने स्वास्थ्य और व्यायाम पर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा, स्वास्थ्य बहुत महत्वपूर्ण है. जीवनशैली बदलने के बीच युवाओं को योग या साइकिल चलाने जैसे अभ्यासों के साथ शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना चाहिए. उच्च शिक्षा या करियर के लिए विदेश जाने की तैयारी कर रहे छात्रों को उन्होंने सलाह दी कि वह वहां जाकर पढ़ें और सीखें लेकिन बाद में देश लौटकर अपनी मातृभूमि की सेवा करें।