नई दिल्ली : पुलवामा आतंकी हमले की पहली बरसी के दिन देश आज शहीद जवानों को याद कर रहा है. इस मौके पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी, साथ ही कई तरह के सवाल भी खड़े कर दिए. नरेंद्र मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए राहुल गांधी ने पूछा कि अभी तक हमले की जांच का क्या हुआ? आखिर इससे किसे फायदा हुआ?

राहुल गांधी ने शुक्रवार को ट्वीट कर पुलवामा हमले पर तीन सवाल पूछे. कांग्रेस नेता ने लिखा, ‘आज जब हम पुलवामा के चालीस शहीदों को याद कर रहे हैं, तब हमें पूछना चाहिए...

  • पुलवामा आतंकी हमले से किसे सबसे ज्यादा फायदा हुआ?
  • पुलवामा आतंकी हमले को लेकर हुई जांच से क्या निकला?
  • सुरक्षा में चूक के लिए मोदी सरकार में किसकी जवाबदेही तय हुई?

Today as we remember our 40 CRPF martyrs in the #PulwamaAttack , let us ask:

1. Who benefitted the most from the attack?

2. What is the outcome of the inquiry into the attack?

3. Who in the BJP Govt has yet been held accountable for the security lapses that allowed the attack? pic.twitter.com/KZLbdOkLK5

— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 14, 2020

राहुल गांधी से पहले सीपीआई (एम) नेता मोहम्मद सलीम ने भी पुलवामा के आतंकी हमले को लेकर सरकार पर निशाना साधा था. मोहम्मद सलीम ने ट्विटर पर लिखा, ‘हमें जवानों के लिए मेमोरियल नहीं चाहिए. बल्कि हम ये जानना चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से 80 किलो RDX कैसे भारत में आ गया, वो भी उस जगह जहां पर सेना की इतनी बड़ी तादाद है.

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को हुए आतंकी हमले के बाद कई तरह के सवाल खड़े हुए थे. क्योंकि जम्मू-कश्मीर में जब इतना बड़ा सेना का काफिला जा रहा था, तब वहां पर एक सामान्य गाड़ी कैसे रास्ते में आ गई. उसमें इतना RDX भरा हुआ था कि सीआरपीएफ की पूरी गाड़ी ही उड़ गई. इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के चालीस जवान शहीद हो गए थे.

जिस वक्त पुलवामा का आतंकी हमला हुआ था, उसके बाद भारतीय सेना ने इसका बदला लिया था और पाकिस्तान के आतंकी अड्डों पर बम दागे थे. इस करारे जवाब में कई आतंकी मारे गए थे. लेकिन इसके तुरंत बाद जब लोकसभा चुनाव आए तो विपक्ष ने भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुनाव प्रचार में सेना का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.

कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने इसको लेकर चुनाव आयोग में शिकायत भी की थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा रैलियों में दिए गए बयानों का हवाला दिया था.