नई दिल्ली : बॉलीवुड इंडस्ट्री के शोमैन राज कपूर ने फिल्मी जगत में एक लंबा सफर तय किया. एक्टिंग उन्हें विरासत में मिली और निर्देशन की एक बड़ी विरासत उन्होंने खुद बनाई. और इसके लिए उन्होंने जबरदस्त संघर्ष किया. यहां तक कि एक समय ऐसा था जब उन्होंने स्पॉटबॉय की नौकरी भी की. इतने बड़े एक्टर के बेटे होने के बावजूद उन्होंने अपने बलबूते पर इंडस्ट्री में जगह बनाई. किसी भी काम को उन्होंने छोटा नहीं समझा. पहले एक्टिंग, फिर डायरेक्शन और देखते ही देखते वे इंडस्ट्री के गॉडफादर बन गए.

राज कपूर ने 17 साल की उम्र में 'रंजीत मूवीकॉम' और 'बॉम्बे टॉकीज' फिल्म प्रोडक्शन कंपनी में स्पॉटबॉय का काम शुरू किया. यहां तक कि इस जॉब के लिए उन्हें चांटा भी खाना पड़ा था. एक दफा उन्होंने फिल्म की शूटिंग के दौरान एक क्लैप बॉय के तौर पर इतनी तेजी से क्लैप कर दिया कि एक्टर की नकली दाढ़ी भी उसमें उलझ कर निकल आई. इसके लिए फिल्म के डायरेक्टर ने उन्हें चांटा भी जड़ दिया था. साल 1947 में उन्होंने मधुबाला के अपोजिट नीलकमल फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी.

इसके बाद उन्होंने आने वाले कुछ सालों में अभिनय की दुनिया में खूब नाम कमाया. आग, बरसात, आवारा, बूट पॉलिश, श्री 420 और जागते रहो जैसी फिल्मों में उन्होंने काम किया. इस दौरान फिल्म निर्देशन में भी उन्होंने कदम रखा. साल 1948 में आग फिल्म बना कर वे उस दौर के सबसे युवा निर्देशकों में से एक बनकर उभरे और सफल भी रहे.

आग, बरसात, आवारा, श्री 420, संगम और मेरा नाम जोकर जैसी फिल्मों का निर्देशन किया. इनमें से कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं तो कुछ कल्ट फिल्में रहीं. 70 का दशक आते-आते एक प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के तौर पर वे काफी सफल रहे थे. धीरे-धीरे उनकी छवि इंडस्ट्री में गॉडफादर के तौर पर हो गई. उन्होंने नई एक्ट्रेसेस को अपनी फिल्मों में ब्रेक दिया. इसमें डिंपल कपाड़िया, निम्मी और मंदाकिनी जैसी एक्ट्रेस शामिल हैं.

साल 1952 में उन्होंने निम्मी को आन फिल्म से ब्रेक दिया. इसके बाद साल 1973 में उन्होंने डिंपल कपाड़िया को बॉबी फिल्म में ब्रेक दिया. और साल 1985 में उन्होंने मंदाकिनी को फिल्म राम तेरी गंगा मैली से लॉन्च किया.

2 जून, 1988 को दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से एक्टर का निधन हो गया था. राज कपूर उन चुनिंदा अभिनेताओं में से एक रहे हैं जिन्होंने बॉलीवुड सिनेमा को दुनिया से इंट्रोड्यूस कराया. रूस में तो उनके व्यक्तित्व और आकर्षण का लोगों पर इतना गहरा प्रभाव रहा कि आज भी राज कपूर की फिल्म के कई सारे गानों का ट्रान्सलेटेड वर्जन रूस में बजाया जाता है.