भोपाल : नर्मदा तट की सुरक्षा, प्रदूषण से मुक्ति और यहां कराए जाने वाले पौधरोपण को लेकर फिर राजनीति गरमा गई है। जहां एक ओर भाजपा सरकार में नर्मदा किनारे कराए गए पौधरोपण की जांच और अपराधिक प्रकरण दर्ज कराने को लेकर वन मंत्री और अफसरों के बीच विवाद थम नहीं रहा है और अंतिम फैसला मुख्यमंत्री कमलनाथ को करना है। वहीं दूसरी ओर नगरीय विकास विभाग ने नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कवायद शुरू करने की बात कही है। इसको लेकर सभी नगर निगम आयुक्तों, नगरीय विकास के संयुक्त संचालकों और नगरपालिका व नगरपरिषदों के सीएमओ को पत्र लिखा गया है।

वचन पत्र की याद दिलाते हुए नगरीय विकास विभाग ने पत्र में कहा है कि विभाग से संबंधित वचन पूरा करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करना है। वचन पत्र में कहा गया है कि नर्मदा के जल को प्रदूषण मुक्त बनाएंगे, कैचमेंट एरिया में वन कटाई पूरी तरह से प्रतिबंधित करेंगे और सामुदायिक तथा वास्तविक पौधरोपण कर उसकी देखरेख पांच साल तक करेंगे। वचन पत्र में यह भी कहा गया है कि नगरीय क्षेत्रों तथा औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषित पानी जो कि नर्मदा में मिलता है, उसे रोकने के लिए कार्यक्रम तैयार करेंगे। नर्मदा की 41 सहायक नदियों को भी संरक्षित करते हुए प्रदूषण मुक्त बनाएंगे। इन नदियों के आसपास भी सामुदायिक पौधरोपण करना है। ये सभी प्रस्ताव अभी लंबित हैं, जिस पर एक्शन लेना है।

नाव चालकों के लिए मांगे सुझाव
कांग्रेस ने वचन पत्र में कहा है कि नगरीय निकायों एवं पर्यटन विभाग की नीति के कारण कई परिवार बेरोजगार हुए हैं। कांग्रेस की सरकार आने पर तालाबों के समीप रहने वाले नाव चालकों से नाव चालन पर किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा और उन्हें इसके लिए प्राथमिकता के आधार पर अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही नाव चालन में ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने और नाव चालन के लिए परंपरागत नाव चालकों को लाइसेंस, परमिट निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। इसको लेकर कहा गया है कि इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही करें और निकाय के पास ऐसे मामलों से संबंधित दस्तावेज, रिकार्ड हों तो शासन को उपलब्ध कराएं।

गोताखोर की भर्ती के लिए नियम ही नहीं
वचन पत्र में कहा गया है कि नगरीय निकायों एवं होमगार्ड में गोताखोरो के पदों पर माझी समाज के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी पर असलियत यह है कि प्रशासनिक सेटअप में गोताखोर का पद ही नहीं है। इसलिए वचनपत्र की यह बात पूरी होने की संभावना नहीं है। इसी तरह वचन पत्र में बड़े एवं मझोले शहरों में निजी क्षेत्र व सहकारी समितियों के सहयोग से बाजार विकसित कर भूमि और अनुदान देने की बात शामिल है। इंदौर, ग्वालियर तथा जबलपुर में ट्रांसपोर्ट हब स्थापित करने और उद्योग विभाग द्वारा जिन उद्योगों से मेंटेनेंस चार्ज लिया जाता है, उन्हें संपत्ति कर से मुक्ति दिए जाने की बात भी वचन पत्र में शामिल है।