भोपाल: मध्य प्रदेश के पवई से बीजेपी विधायक प्रहलाद लोधी की विधानसभा सदस्यता खत्म होने के मामले में कमलनाथ सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका मिला है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली मध्य प्रदेश सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है. बता दें कि हाईकोर्ट ने प्रहलाद लोधी की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें अंतरिम राहत दी थी. इसके खिलाफ राज्य शासन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक के हाईकोर्ट के फैसले को सही बताते हुए राज्य शासन की याचिका को खारिज कर दिया है.

दरअसल, पन्ना जिले के पवई से विधायक प्रहलाद लोधी को मारपीट के मामले में भोपाल की एक स्पेशल कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई थी. इसके कारण प्रहलाद लोधी की विधानसभा सदस्यता पर खतरा मंडराने लगा था. वहीं, इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने प्रहलाद लोधी की सदस्यता खत्म होने के आदेश जारी किए थे. स्पेशल कोर्ट से मिली दो साल की सजा के खिलाफ प्रहलाद लोधी हाईकोर्ट पहुंच गए थे. हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सजा पर रोक लगा दी थी.

क्या था मामला
पन्ना की पवई विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक प्रह्लाद लोधी सहित 12 लोगों को भोपाल की एक विशेष अदालत ने दो नवंबर को दो साल की जेल की सजा सुनाई थी. अदालत ने सभी को साढ़े तीन हजार रुपये जुर्माने भी लगाया था. हालांकि, सजा मिलने के बाद बीजेपी विधायक को जमानत भी मिल गई थी.

दरअसल, 2014 में पन्ना जिले की रैपुरा तहसील में नोनीलाल लोधी अवैध रेत खनन में लिप्त पाए गए थे. अवैध खनन को रोकने के लिए वहां तहसीलदार पहुंचे थे. इस दौरान वहां बीजेपी विधायक प्रह्लाद लोधी अपने समर्थकों के साथ पहुंच गए. कार्रवाई का विरोध करते हुए प्रह्लाद लोधी और उनके समर्थकों ने तहसीलदार के साथ मारपीट की और अभद्र व्यवहार किया था.

तहसीलदार की ओर से इस मामले में मुकदमा दर्ज करवाया गया था. पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए बीजेपी विधायक समेत 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था. तहसीलदार के साथ मारपीट और अभद्रता करने के इस मामले में बीजेपी विधायक और उनके समर्थकों को 2 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई थी.