श्रीनगर: पैरामिलिट्री यूनिट (अर्धसैनिक इकाई) के लिए काम करने वाले राकेश कुमार (बदला हुआ नाम) ने अपने परिवार को एसएमएस भेजने के लिए एक नया तरीका खोज निकाला. हालांकि कश्मीर घाटी में पांच अगस्त से एसएमएस, इंटरनेट सेवा का बंद रहना बदस्तूर जारी है.अधिकारियों ने घाटी में पोस्ट-पेड मोबाइल फोन सेवाओं को बहाल कर दिया है, लेकिन पांच अगस्त से अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से एसएमएस और इंटरनेट सेवा अभी भी बंद हैं. प्रीपेड मोबाइल फोन सेवा अभी भी बहाल किया जाना है.  इस बीच, राकेश पिछले तीन महीनों से श्रीनगर के पुराने शहर क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी पर तैनात हैं.

वह ड्यूटी की अवधि के दौरान हरियाणा में अपनी पत्नी को फोन करने के लिए अपने मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर सकते हैं, जिससे उनकी पत्नी को चिंता होती है. कानून-व्यवस्था पर ड्यूटी के दौरान निजी उद्देश्यों के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करना अर्धसैनिक बल के सेवा नियम के खिलाफ है.

फिर वह ड्यूटी की अवधि के दौरान अपने हालचाल के बारे में परिवार को कैसे जानकारी देते हैं, जबकि एसएमएस सेवा बंद है? पिछले एक महीने से, राकेश अपने खाते से प्रतिदिन 100 रुपये निकालने के लिए अपने एटीएम कार्ड का उपयोग कर रहे हैं, जिसने सुरक्षा गार्ड को उनके इस नियमित व्यवहार के बारे में जानने के लिए उत्सुक कर दिया.

शुक्रवार को, गार्ड ने आखिरकार साहस कर राकेश से पूछ लिया कि वह प्रत्येक दिन 100 रुपये क्यों निकालते हैं, जबकि वह एक बार में 3,000 रुपये निकाल सकते हैं और खुद को रोजाना एटीएम जाने की परेशानी से बचा सकते हैं.राकेश मुस्कुराए और एटीएम गार्ड से विनम्रता से कहा, "यह मेरा पत्नी के साथ दिन के समय बात करने का तरीका है."

हैरान गार्ड ने पूछा, "और आप वह कैसे करते हैं?" राकेश ने कहा, "मेरे बैंक खाते में पंजीकृत मोबाइल फोन नंबर का उपयोग मेरी पत्नी करती है." उन्होंने आगे कहा, "हर बार जब मैं अपने बैंक खाते से पैसे निकालता हूं तो मेरी पत्नी को उसके फोन पर पैसे निकालने का संदेश मिलता है. इस तरह से उसे पता चलता है कि मैं ठीक और सुरक्षित हूं."

यह वास्तव में ऐसी जगह से परिवारों को अपने कुशल होने का संदेश भेजने का एक अच्छा तरीका है, जहां एसएमएस सेवा बंद है. व्यवसायी, छात्र, पेशेवर और ट्रांसपोर्टर कश्मीर में एसएमएस और इंटरनेट सुविधा दोनों को बहाल करने की मांग कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का तर्क है कि अधिकारियों द्वारा यह दावा करने के बावजूद कि घाटी में हालात सामान्य हैं, दोनों सेवाओं को बंद रखने से उनकी आजीविका बर्बाद हो गई है.